रायपुर 12 अक्टूबर 2025 | स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क
भारत-अमेरिका संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत उस समय हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर को अमेरिका के मनोनीत राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। यह सिर्फ एक सौजन्य भेंट नहीं थी, बल्कि दो वैश्विक लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच भविष्य की रणनीतिक दिशा का संकेत भी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा जताया कि गोर का कार्यकाल दोनों देशों की मित्रता को नई ऊर्जा और गहराई प्रदान करेगा।
इस मुलाकात को भावनात्मक मोड़ तब मिला जब गोर ने प्रधानमंत्री मोदी को एक विशेष फ्रेमयुक्त तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर इस वर्ष की शुरुआत में हुई मोदी-ट्रंप बैठक की थी, जिसके साथ पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का हस्तलिखित संदेश भी संलग्न था—
“प्रधानमंत्री महोदय, आप महान हैं।”
यह संदेश दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर दोनों देशों के नेताओं के बीच गहरी समझ और सम्मान बना हुआ है।
गोर की नियुक्ति: संकेत दोस्ती का या कूटनीतिक चुनौती का?
सर्जियो गोर, जो व्हाइट हाउस के वरिष्ठ कार्मिक निदेशक और डोनाल्ड ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं, को अगस्त में भारत के लिए अमेरिकी राजदूत नामित किया गया था। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि वे राष्ट्रपति ट्रम्प के “अविश्वसनीय विश्वास और भरोसे” के लिए आभारी हैं। उनका कहना था कि भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाना उनका प्रमुख उद्देश्य होगा।
व्यापार विवादों की पृष्ठभूमि में यह मुलाकात
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेद गहराए हुए हैं।
- अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50% तक बढ़ाने का फैसला
- भारत द्वारा अमेरिकी कदम को “अनुचित और अविवेकपूर्ण” कहना
- रूसी तेल की खरीद पर अमेरिका की तीखी प्रतिक्रिया
- एच1-बी वीज़ा से जुड़े नए नियमों पर भारत की नाराज़गी
इन सबके बीच यह बैठक उम्मीद की एक किरण लेकर आई है।
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हालिया संवाद से बढ़ी उम्मीदें
हाल ही में हुई फोन वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प की गाज़ा शांति योजना की सराहना की थी। इससे पहले ट्रम्प ने 17 सितंबर, मोदी के 75वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पूर्व, उन्हें फोन कर शुभकामनाएं दी थीं। ऐसे व्यक्तिगत संवाद संकेत देते हैं कि शीर्ष स्तर पर संबंध अब भी मजबूत हैं।
व्यापार समझौते की नई उम्मीद
दोनों देशों ने कुछ समय बाद व्यापार वार्ताओं को फिर शुरू किया है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी संकेत दिया है कि निकट भविष्य में एक “पारस्परिक रूप से लाभकारी” समझौता संभव है। पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी आशा जताई है कि भारत और अमेरिका एक संतोषजनक एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) को अंजाम दे सकते हैं।
श्रृंगला ने “हाउडी मोदी” और “नमस्ते ट्रम्प” जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि इन आयोजनों ने दोनों नेताओं के बीच ‘विशेष और निजी साझेदारी’ को स्थापित किया, जिसे गोर जैसे राजनयिक आगे बढ़ाएंगे या परखेंगे।
कूटनीतिक मोड़ पर खड़ा है भारत-अमेरिका संबंध
सर्जियो गोर की भारत यात्रा केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए दिशा तय करने वाला क्षण है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद व्यापारिक विवादों की बर्फ पिघलाएगा या नए राजनीतिक समीकरण उभरेगा।
क्या गोर भारत-अमेरिका संबंधों में पुल बनेंगे — या तनाव के नए अध्याय के साक्षी?


