दंतेवाड़ा : 02 अगस्त 2025
दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग के बीएमओ पद पर हाल ही में नियुक्त डॉक्टर देवेंद्र प्रताप एक बार फिर विवादों में हैं। उन पर करीब तीन साल पहले मजदूर को अस्पताल में बंधक बनाने का गंभीर आरोप सामने आया है।
जगदलपुर के एक पेट्रोल पंप पर काम करने वाले डीहू राम विश्वकर्मा के हाथ में चोट लगने पर उसे श्री बालाजी केयर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां टांके लगाने के बदले 40 हजार का बिल थमा दिया गया। पैसे न देने पर उसे अस्पताल में ही बंधक बना लिया गया। बाद में जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और प्रशासन के हस्तक्षेप से मजदूर को छोड़ा गया।
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डॉ. देवेंद्र प्रताप व उनकी पत्नी इस निजी अस्पताल का संचालन करते हैं। नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. श्रेयांश जैन ने पुष्टि की कि अस्पताल उनकी पत्नी के नाम से पंजीकृत है।
चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ. देवेंद्र प्रताप करीब 46 महीने (1408 दिन) से सेवा से अनुपस्थित थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें सीधे BMO जैसे जिम्मेदार पद पर तैनात कर दिया।पूर्व में कोविड अस्पताल प्रभारी रहते हुए मरीज को बाहर निकालने, नोटिसों का जवाब न देने, और इलाज के दौरान मरीज की मौत जैसे गंभीर मामले भी उनके नाम जुड़े हैं।
कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष अनिल कर्मा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं कि सेवा से गैरहाजिर रहने और विवादों में रहने के बावजूद डॉ. देवेंद्र प्रताप को पद कैसे दिया गया? क्या किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में यह निर्णय हुआ? छत्तीसगढ़ शासन के नियमानुसार, 3 साल तक बिना सूचना के अनुपस्थित कर्मचारी को सेवा से स्वत: त्यागपत्र दिया मान लिया जाता है, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई – यह बड़ा सवाल बन गया है।
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