बिलासपुर: 02 अगस्त 2025
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अशासकीय विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2020 और उसके नियमों को संवैधानिक करार देते हुए प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा कि फीस निर्धारण का अधिकार राज्य सरकार के पास है, और इसका उद्देश्य केवल पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
मुख्य बातें:
- हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता संघ है, न कि नागरिक, इसलिए वे अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत अधिकार नहीं जता सकते।
- अधिनियम के अनुसार, कोई भी स्कूल बिना समिति की अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकता।
- फीस वृद्धि की सीमा अधिकतम 8% तय की गई है, और इसके लिए 6 महीने पहले प्रस्ताव देना अनिवार्य होगा।
- जिले में कलेक्टर और राज्य स्तर पर स्कूल शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में फीस निर्धारण समितियां गठित होंगी।
- अभिभावक संघ भी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे, और समितियों को उन पर सुनवाई करनी होगी।
- नियमों के उल्लंघन पर कार्यवाही का प्रावधान है और स्कूलों को अपने रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे।
इस फैसले से राज्य के लाखों छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलेगी और प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी।
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