रिपोर्ट : स्वतंत्र छत्तीसगढ़
10 जुलाई को JNU में बोलते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा था कि वे “अगस्त 2027 में रिटायर होंगे, यदि कोई दिव्य शक्ति हस्तक्षेप न करे”, लेकिन मात्र 11 दिन बाद 21 जुलाई की रात उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।लेकिन कई घटनाएं बताती हैं कि मामला सिर्फ सेहत का नहीं था:
तीन संकेत जो पहले ही दिखने लगे थे:
- शिवराज सिंह पर मंच से सवाल:
दिसंबर 2024 में धनखड़ ने एक समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से खुले मंच पर किसान मुद्दों पर जवाब मांगा। ये बात पार्टी नेतृत्व और RSS को नागवार गुजरी। - जस्टिस वर्मा पर महाभियोग:
लोकसभा में पहले ही 150 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर साइन किए थे, फिर भी धनखड़ ने राज्यसभा में विपक्ष के साथ मिलकर अलग से प्रस्ताव तैयार किया। इससे कानून मंत्री नाखुश हुए। - जेपी नड्डा से टकराव:
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने से न रोकने पर BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा नाराज हो गए। PAC मीटिंग में भी उनका और किरेन रिजिजू का अनुपस्थित रहना संकेत था कि पार्टी उपराष्ट्रपति से दूरी बना चुकी थी।
🟡 क्या इस्तीफे की स्क्रिप्ट पहले ही लिख दी गई थी?
- 20 जुलाई को उनकी पत्नी का जन्मदिन था, इसी दिन एक पार्टी आयोजित की गई जिसमें सभी पार्टियों के नेता और राज्यसभा स्टाफ शामिल हुए।
- पार्टी को अब “फेयरवेल पार्टी” की तरह देखा जा रहा है।
- अगले सप्ताह का कार्यक्रम तय होने के बावजूद 21 जुलाई रात 9 बजे इस्तीफा देना बताता है कि फैसला अचानक नहीं था, बल्कि संकेतों के बाद दबाव में लिया गया निर्णय था।
🔵 अब सवाल: अगला उपराष्ट्रपति कौन?
1. राजनाथ सिंह
- पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में, RSS की पसंद, सभी दलों में स्वीकार्य।
- राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उन्हें अब तक “उनकी काबिलियत के अनुसार” पद नहीं मिला।
- उन्हें उपराष्ट्रपति और बाद में राष्ट्रपति बनाए जाने की अटकलें हैं – एक तरह से संवैधानिक पद पर 10 साल का रास्ता।
2. शिवराज सिंह चौहान
- OBC चेहरा, अनुभवशील, केंद्र व राज्य की राजनीति का संतुलन।
- अभी कृषि मंत्री हैं, लेकिन हालिया विवाद से उनकी छवि पर असर पड़ा है। फिर भी RSS का भरोसा उनके साथ है।
3. रविशंकर प्रसाद
- अनुभवी सांसद, वकील, केंद्र में मंत्री रह चुके।
- सरकार से फिलहाल बाहर हैं – इसलिए उपराष्ट्रपति पद एक उचित समायोजन हो सकता है।
4. हरिवंश नारायण सिंह
- वर्तमान में राज्यसभा उपसभापति।
- जेडीयू नेता हैं, लेकिन NDA में अच्छे रिश्ते।
- पत्रकारिता और संसदीय अनुभव को देखते हुए, गठबंधन संतुलन के प्रतीक के रूप में उन्हें चुना जा सकता है।
5. नीतीश कुमार
- लंबे समय से बिहार के मुख्यमंत्री।
- यदि BJP बिहार में CM बनाना चाहे तो नीतीश को उपराष्ट्रपति पद देकर दिल्ली बुला सकती है।
- लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि सरकार बिहार से किसी को नहीं चुनेगी, क्योंकि उपसभापति हरिवंश भी वहीं से हैं।
6. आरिफ मोहम्मद खान
- मौजूदा केरल के राज्यपाल।
- मुस्लिम समाज की कुरीतियों के खिलाफ मुखर होने से सरकार का चेहरा हो सकते हैं।
- लेकिन यह विकल्प BJP की परंपरागत रणनीति से मेल नहीं खाता।
7. शशि थरूर
- विपक्ष से नाम उछल रहा है, लेकिन उनका राजनीतिक व्यक्तित्व और विदेशों में सक्रियता उन्हें इस भूमिका से फिलहाल दूर ही रखती है।
🟠 राजनीतिक संदेश क्या है?
- सरकार यह दिखाना चाहती है कि संवैधानिक पदों पर पार्टी लाइन से अलग सोच वाले नेता अब स्वीकार्य नहीं हैं।
- आगामी उपराष्ट्रपति में पार्टी और सरकार की नीतियों से पूर्ण समन्वय की अपेक्षा की जा रही है।
- नए चेहरों के जरिए लोकसभा चुनाव 2029 और राष्ट्रपति चुनाव 2027 की तैयारी भी दिखती है।
इन तथ्यों से यह पता चलता है की जगदीप धनखड़ का इस्तीफा केवल व्यक्तिगत या स्वास्थ्य कारणों से नहीं था। यह सत्ता और संवैधानिक संस्थाओं के बीच “अनकहे तनाव” की परिणति थी। अब सरकार संघ और पार्टी लाइन से पूरी तरह समर्पित चेहरा चाहती है जो राज्यसभा को सुचारु रूप से चलाए और विपक्ष को सीमाओं में रखे।
सबसे प्रबल दावेदार:
👉 राजनाथ सिंह – यदि सरकार उन्हें बड़े संवैधानिक रोल में लाना चाहती है।
👉 हरिवंश – यदि गठबंधन को साधने की रणनीति हो।
👉 शिवराज सिंह – यदि OBC समीकरण और अनुभव दोनों चाहिए हों।
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