रायपुर: 20 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ में हाल के वर्षों में उभरते सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक – शराब घोटाले – ने राजनीतिक हलकों में भारी हलचल मचा दी है। इस बहुचर्चित घोटाले में अब तक कई बड़ी गिरफ्तारियाँ और खुलासे हो चुके हैं, परंतु हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल के नाम का सामने आना इस प्रकरण को और अधिक गंभीर और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना देता है। शुक्रवार, 19 जुलाई 2025 को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में प्रस्तुत रिमांड याचिका में ईडी ने दावा किया कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं और वे 1000 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन में शामिल रहे हैं। यह आरोप भारतीय राजनीति के एक संवेदनशील बिंदु को छूता है — सत्ता, भ्रष्टाचार और पारिवारिक लाभ।
ईडी द्वारा अदालत में दायर आवेदन में कई चौंकाने वाले तथ्यों का उल्लेख किया गया है:
1. आपराधिक आय और मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि
ईडी ने बताया कि प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट होता है कि चैतन्य बघेल को शराब घोटाले से उत्पन्न अपराध की आय प्राप्त हुई। वे इस धन को छुपाने, स्थानांतरित करने, उपयोग करने और उसे वैध दिखाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थे। इसका सीधा अर्थ है कि उन्होंने न केवल इस काले धन को प्राप्त किया, बल्कि उसका संरचनात्मक ‘वाइटवॉश’ करने का भी प्रयास किया।
2. सहेली ज्वैलर्स से फंड ट्रांसफर
जांच के दौरान चैतन्य से जुड़ी दो फर्मों को “मेसर्स सहेली ज्वैलर्स” से 5 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई। यह राशि नकद के बदले ट्रांसफर की गई थी, जिसकी पुष्टि शराब घोटाले में आरोपी लक्ष्मीनारायण बंसल उर्फ पप्पू ने अपने बयान में की। इसमें यह भी कहा गया कि चैतन्य ने इस भुगतान पर कोई ब्याज नहीं दिया और 4.5 करोड़ रुपये अब तक वापस नहीं किए गए हैं।
136 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा
ईडी ने बताया कि शराब घोटाले की तह में जाने पर यह जानकारी सामने आई कि बंसल को केवल तीन महीनों में 136 करोड़ रुपये नकद मिले थे। यह खुलासा अनवर ढेबर और नितेश पुरोहित के बीच हुई बातचीत के विश्लेषण से हुआ। बंसल ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने चैतन्य बघेल के साथ मिलकर 1000 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी को विभिन्न माध्यमों से संभाला और वितरित किया। यह नकद अनवर ढेबर (शराब व्यवसायी) से दीपेन चावड़ा के माध्यम से प्राप्त की गई थी, जो पूरे घोटाले में एक मनी-हैंडलर के रूप में उभर कर सामने आए हैं।
पैसे का हस्तांतरण और राजनीतिक संबंध
ईडी के अनुसार, बंसल ने इस नकदी का बड़ा हिस्सा कांग्रेस नेता राम गोपाल अग्रवाल तक चैतन्य के निर्देश पर पहुँचाया। इसके अतिरिक्त केके श्रीवास्तव को भी 80 से 100 करोड़ रुपये की नकदी दी गई। यह खुलासा इस बात की पुष्टि करता है कि चैतन्य बघेल न केवल इस लेन-देन में मध्यस्थ थे, बल्कि उन्होंने कई प्रमुख राजनीतिक और वित्तीय खिलाड़ियों को निर्देश भी दिए।
बघेल डेवलपर्स की ‘विट्ठल ग्रीन परियोजना’ में काली कमाई का उपयोग
ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल ने मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे को ‘बघेल डेवलपर्स’ की परियोजना ‘विट्ठल ग्रीन’ में निवेश कर उसे वैध रूप देने की कोशिश की। इस परियोजना की वास्तविक लागत 13-15 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि बहीखातों में केवल 7.14 करोड़ रुपये दिखाए गए। यह अंतर सीधे तौर पर अघोषित नकदी निवेश की ओर इशारा करता है। ईडी ने इस परियोजना से जुड़े अकाउंटेंट्स और कर्मचारियों से पूछताछ की और जरूरी दस्तावेज जब्त किए। इन दस्तावेजों में लागत को जानबूझकर कम दिखाने, कच्चे माल की खरीद का अघोषित भुगतान, और नकद लेन-देन के स्पष्ट प्रमाण मिले।
चैतन्य बघेल का रवैया और ईडी की हिरासत
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि चैतन्य बघेल को कई बार दस्तावेज और पूछताछ के माध्यम से जानकारी देने का अवसर दिया गया, परंतु उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। उनका यह व्यवहार प्रक्रिया से बचने और तथ्यों को छुपाने की कोशिश के रूप में देखा गया। ईडी के वकील सौरभ कुमार पांडे के अनुसार, चैतन्य बघेल को शुक्रवार को पीएमएलए की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ 22 जुलाई तक पांच दिन की हिरासत स्वीकृत की गई।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
इस प्रकरण ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गरमा दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे “कांग्रेस के शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की पुष्टि” के रूप में प्रस्तुत किया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मीडिया से बात करते हुए आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ईडी का इस्तेमाल कर राजनीतिक विरोधियों को डराने की कोशिश कर रही है। हालांकि, भाजपा प्रवक्ता ने जवाब में कहा कि यह मामला साक्ष्य आधारित है और इसमें अनेक दस्तावेजी प्रमाण व गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। उन्होंने चैतन्य बघेल को “भ्रष्टाचार की नई पीढ़ी का चेहरा” बताया।
जनता की प्रतिक्रिया और सामाजिक प्रभाव
इस प्रकरण से जनता में भी गहरी नाराजगी देखी जा रही है। युवा वर्ग, जो भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन की अपेक्षा करता है, इस मामले में राजनीतिक संरक्षण और परिवारवाद की भूमिका को लेकर चिंतित है। सोशल मीडिया पर #LiquorScam, #ChaitanyaBaghel, और #CorruptionInChhattisgarh जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का असर आगामी राज्य विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है, क्योंकि इसमें कांग्रेस नेतृत्व के परिवार पर सीधा आरोप लगा है।
कानूनी पहलू और आगे की राह
यह पूरा मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज है। इसमें सजा के तौर पर 3 से 7 साल की कैद और जुर्माना संभव है। अगर ईडी चैतन्य बघेल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करती है और साक्ष्य मजबूत साबित होते हैं, तो यह राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गंभीर परिणाम ला सकता है।
छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला न केवल एक आर्थिक अपराध का मामला है, बल्कि यह शासन, पारदर्शिता और राजनीतिक नैतिकता की कसौटी पर भी सवाल खड़ा करता है। चैतन्य बघेल जैसे युवा नेता का इस प्रकार के आरोपों में शामिल होना जनता की अपेक्षाओं को ठेस पहुंचाता है। ईडी की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, परंतु अब तक के सबूत इस घोटाले के व्यापक नेटवर्क और राजनीतिक संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या चैतन्य बघेल और उनके सहयोगी आरोपों से मुक्त हो पाते हैं, या फिर यह मामला उन्हें और कांग्रेस पार्टी को गंभीर कानूनी और राजनीतिक संकट की ओर ले जाएगा।
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