बिलासपुर : 11 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति का नैतिक और कानूनी दायित्व है कि वह मृतक कर्मचारी के आश्रितों का भरण-पोषण करे, जब तक वे आत्मनिर्भर न हो जाएं।
यह मामला जशपुर जिले का है, जहां विद्युत कंपनी के कर्मचारी सुरेंद्र खाखा की मृत्यु के बाद उनकी सौतेली पत्नी ने बेटे को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए सहमति दी थी। शर्त यह थी कि वह मां और छोटे भाई-बहनों की देखभाल करेगा।
शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन शादी के बाद बेटे ने परिवार से नाता तोड़ लिया। इस पर सौतेली मां ने परिवार न्यायालय में याचिका दाखिल की, जिसमें भरण-पोषण की मांग की गई थी।
परिवार न्यायालय ने बेटे को आदेश दिया कि वह मां को ₹1000 प्रतिमाह (पुनर्विवाह तक) और छोटे भाई-बहनों को ₹3000-₹3000 प्रतिमाह (बालिग होने तक) भुगतान करे।
यह भी पढ़े : 60 फीट गहरी खाई में गिरा ट्रक, 4 की मौत, 2 गंभीर घायल…
जनवरी 2023 में भाई-बहन बालिग हो गए, तो बेटे ने हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा:
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार की आजीविका सुनिश्चित करना है। यह केवल नौकरी नहीं, जिम्मेदारी भी है। अब बेटे को आदेश की तिथि से ₹7000 प्रतिमाह की दर से भुगतान करना होगा।
यह फैसला उन लोगों के लिए मिसाल बनेगा, जो अनुकंपा नियुक्ति लेकर पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं।
हमारे whatsapp ग्रुप से जुड़ें;https://chat.whatsapp.com/BbNFAy9gDg1E4s1kHkjJrG हमारे फेसबुक से जुड़ें;https://www.facebook.com/me हमारे यूट्यूब से जुड़ें; https://www.youtube.com/@swatantrachhattisgarh हमारे व्हात्सप्प चैनल से जुड़ें; https://whatsapp.com/channel/0029VaSGTZ1Lo4hYCjY45G2q हमारे ट्वीटर से जुड़ें; https://x.com/c35509


