नई दिल्ली/हासन (कर्नाटक): 3 जुलाई 2025
कर्नाटक के हासन जिले में हाल ही में दिल के दौरे से हुई मौतों को लेकर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया द्वारा कोविड रोधी टीकों पर सवाल उठाने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि देश में किए गए कई व्यापक अध्ययनों से यह निर्णायक रूप से प्रमाणित हो चुका है कि कोविड टीकों और अचानक हुई मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को बयान देते हुए आशंका जताई थी कि “जल्दबाज़ी में कोविड टीकों को मंजूरी देकर लोगों को लगाना” हासन में हुई मौतों का एक संभावित कारण हो सकता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ होने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) द्वारा किए गए दो बड़े अध्ययनों ने यह साफ कर दिया है कि कोविड टीकाकरण और युवाओं में अचानक हुई मौतों के बीच कोई संबंध नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, आईसीएमआर और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) के अध्ययन यह दिखाते हैं कि भारत में कोविड-19 टीके पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी हैं। इन टीकों से जुड़े गंभीर दुष्प्रभाव के मामले बेहद दुर्लभ हैं। मई से अगस्त 2023 के बीच किए गए एक अध्ययन में देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 47 प्रमुख अस्पतालों से आंकड़े जुटाए गए थे। इसमें अक्टूबर 2021 से मार्च 2023 तक की अवधि में 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के उन व्यक्तियों को शामिल किया गया जो सामान्य रूप से स्वस्थ थे लेकिन अचानक मृत्यु के शिकार हुए। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला कि कोविड टीके से इस आयु वर्ग में अचानक मृत्यु का खतरा नहीं बढ़ता। दूसरी ओर, एम्स, नई दिल्ली द्वारा चलाए जा रहे एक अन्य अध्ययन, जिसका शीर्षक “युवाओं में अचानक मौत के कारणों की पहचान” है, में यह पाया गया कि अधिकांश मामलों में हृदयाघात और जेनेटिक म्यूटेशन प्रमुख कारण रहे हैं।
मंत्रालय ने दोहराया कि “कोविड टीकाकरण को अचानक मौतों से जोड़ने वाले बयान न केवल भ्रामक हैं बल्कि इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।” इस तरह के दावे टीकों पर लोगों के विश्वास को कमजोर करते हैं, जबकि टीकाकरण ने महामारी के दौरान लाखों जानें बचाई हैं।केंद्रीय मंत्रालय ने चेतावनी दी कि बेबुनियाद दावे देश में टीका झिझक को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।इस बीच, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि हासन जिले में पिछले एक महीने में 20 से अधिक लोगों की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है। राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. रवींद्रनाथ की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की समिति गठित की है। समिति को 10 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
राज्य सरकार के इस कदम के बावजूद, केंद्र ने स्पष्ट किया है कि टीकों को लेकर संदेह फैलाना वैज्ञानिक तथ्यों के विरुद्ध है और इससे महामारी से निपटने में अब तक की गई प्रगति को खतरा हो सकता है।ह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
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