बीजापुर : 06 जून 2025
बस्तर संभाग में नक्सलवाद का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है और अब यहां शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की बात जोर पकड़ रही है। बीजापुर के पूवर्ती, टेकलगुड़ेम और सिलगेर जैसे नक्सल प्रभावित गांवों में अब शिक्षा का माहौल बन रहा है। खास बात यह है कि कुख्यात नक्सली हिड़मा के गांव पूवर्ती में सीआरपीएफ ने पहली बार गुरुकुल की स्थापना की है, जिसमें लगभग 80 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
यह क्षेत्र पहले सड़कों और बुनियादी सुविधाओं से वंचित था, लेकिन अब 2024 में अफसर इन गांवों तक पहुंचने में सक्षम हो चुके हैं। सीआरपीएफ न केवल बच्चों को पढ़ाई के लिए किताब-कापी मुहैया करा रही है, बल्कि खेलकूद और अन्य गतिविधियों के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। तीन गुरुकुल फिलहाल सक्रिय हैं, जिनमें बच्चे सुरक्षित माहौल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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कुछ बच्चे 100 किलोमीटर दूर कुआकोंडा के पोटाकेबिन छात्रावासों में रहकर भी पढ़ाई कर रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर अवसर मिल रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी जीआर मंडावी ने बताया कि बच्चों का सर्वे किया जा रहा है और पूवर्ती में एक नया स्कूल भी बन रहा है। साथ ही, 35 ऐसे बच्चे जो पढ़ाई छोड़ चुके थे, उन्हें फिर से स्कूल से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह पहल नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास और मुख्यधारा से जोड़ने की एक मिसाल बन रही है। बस्तर अब न केवल नक्सलवाद से लड़ाई का मैदान है, बल्कि शिक्षा और विकास का नया केन्द्र भी बनता जा रहा है। इस बदलाव की दिशा में गुरुकुलों की स्थापना एक बड़ा कदम साबित हो रही है, जो बच्चों के उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ रही है।
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