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10 घंटे का सफर 3 घंटे में होगा पूरा, बीजापुर को मिली बड़ी सौगात…

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बीजापुर : 05 मार्च 2025 (sc टीम)

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का एक छोटा सा गांव पामेड़ 25 साल बाद फिर से दुनिया से जुड़ गया है। माओवादियों के कारण कटे हुए रास्ते अब खुल गए हैं। एक नई बस सेवा जिसे प्यार से ‘बीजापुर एक्सप्रेस’ कहा जा रहा है पामेड़ को जिला मुख्यालय से जोड़ रही है। इससे पहले ग्रामीणों को तेलंगाना के रास्ते 10 घंटे की लंबी और कठिन यात्रा करनी पड़ती थी। अब यह यात्रा केवल 3 घंटे में पूरी हो जाती है। पुलिस और सीआरपीएफ कैंपों की वजह से यह संभव हुआ है। इन कैंपों ने माओवादियों के आतंक को कम किया है और विकास के रास्ते खोले हैं।

बीजापुर के पामेड़ गांव के लोगों के लिए यह बस सेवा किसी जीवन रेखा से कम नहीं है। 25 साल के लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को पहली बस सेवा शुरू हुई। इस खुशी के मौके पर लोगों ने लड्डू बांटकर खुशियाँ मनाईं। पामेड़ कभी माओवादियों का गढ़ हुआ करता था। सलवा जुडुम के खूनी दिनों में यह इलाका बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गया था। पीएलजीए बटालियन नंबर 1 के माओवादी यहां राज करते थे। वे सड़कें काटते, बसें जलाते, आवाजाही रोकते और लोगों को मारकर दहशत फैलाते थे।

पामेड़ से आने-जाने के लिए लोगों को तेलंगाना के चेरला होते हुए 230 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता था। इसमें 10 घंटे लगते थे। बारिश के मौसम में तो हालात और भी बदतर हो जाते थे। पामेड़ के लगभग 1000 आदिवासी निवासी पूरी तरह से फंस जाते थे। स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में प्रार्थना ही उनका एकमात्र सहारा होती थी। लेकिन अब, नई बस सेवा ने उनकी ज़िंदगी बदल दी है। 90 किलोमीटर की दूरी अब सिर्फ़ 3 घंटे में तय हो जाती है।

यह सब सुरक्षा बलों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। छत्तीसगढ़ पुलिस ने तर्रेम-पामेड़ मार्ग पर कई नए कैंप स्थापित किए हैं। इन कैंपों ने न सिर्फ़ सुरक्षा प्रदान की है, बल्कि छोटे स्तर पर विकास को भी बढ़ावा दिया है। इसी विकास ने 25 साल से बंद पड़ी सड़क को फिर से खोलने का रास्ता साफ किया है। बीजापुर के कलेक्टर सम्बित मिश्रा ने बताया कि पहले, पामेड़, धर्मवारम, कंचल और कोंडापल्ली जैसे गांव पूरी तरह से तेलंगाना पर निर्भर थे। लेकिन जिला मुख्यालय से बस सेवा शुरू होने से स्थिति बदल गई है।

धर्मवारम के पास चिंतावागु नदी पर बना 264 मीटर लंबा नया पुल इस सड़क संपर्क को फिर से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बस सेवा अब बीजापुर को अवापल्ली, जो ब्लॉक मुख्यालय है, होते हुए पामेड़ से जोड़ती है। इस रूट पर फिलहाल दो प्राइवेट बसें चल रही हैं। एक बस सुबह बीजापुर से चलकर पामेड़ पहुंचती है और शाम तक वापस आ जाती है। दूसरी बस सुबह पामेड़ से चलकर जगदलपुर जाती है और शाम तक वापस आ जाती है।

CRPF ने पिछले तीन महीनों में बीजापुर-अवापल्ली-बसगुड़ा-तर्रेम-कोंडापल्ली-झिटपल्ली-पामेड़ मार्ग पर 5-6 कैंप खोले हैं। इसके अलावा, सीमा सड़क संगठन तर्रेम से कोंडापल्ली और पामेड़ तक सड़क बना रहा है। ग्रामीणों ने इस बस सेवा को पूरे दिल से अपनाया है। 50 सीटों वाली ये बसें पूरी क्षमता से चल रही हैं। अपने राज्य से सीधा संपर्क बहाल होने से लोगों की आवाजाही काफी बढ़ गई है। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण अब इस रूट पर और बसें चलाने की मांग कर रहे हैं।

एक सीआरपीएफ अधिकारी ने बताया कि सीआरपीएफ की 196वीं बटालियन द्वारा बीजापुर के पुजारिकंकर में एक फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) की स्थापना ने स्थानीय ग्रामीणों के लिए दैनिक बस सेवा के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया है। यह बस पहले अवापल्ली-पामेड़ मार्ग पर नांबी तक चलती थी, और अब इसे पुजारिकंकर तक बढ़ा दिया गया है। यह बस सेवा पामेड़ के लोगों के लिए सिर्फ़ एक परिवहन साधन नहीं है, बल्कि विकास, प्रगति और बेहतर भविष्य का प्रतीक है।

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