द्वारा: डॉ स्मिथ श्रीवास्तव
स्वतंत्र छत्तीसगढ़
रायपुर, छत्तीसगढ़। कोरोना महामारी के बाद बदलती जीवनशैली युवाओं के दिल पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थान डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज में किए गए एक क्लीनिकल अध्ययन ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। अध्ययन के अनुसार 40 वर्ष या उससे कम उम्र के युवाओं में गंभीर हृदय संबंधी आपात स्थिति के मामलों में कोरोना के बाद करीब ढाई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों ने इसे युवाओं के लिए गंभीर चेतावनी बताया है।
हेड लाइंस
कोरोना के बाद 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में बढ़े हार्ट इमरजेंसी के मामले
पहले 8 प्रतिशत, अब करीब 21 प्रतिशत युवा मरीज कार्डियक इमरजेंसी में शामिल
शराब सेवन, डायबिटीज, तंबाकू, मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली बड़ी वजह
विशेषज्ञों ने रोजाना 30 मिनट व्यायाम और नियमित हार्ट स्क्रीनिंग की दी सलाह
288 मरीजों पर किया गया अध्ययन
कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में डॉ. सुरेश चंद्रवंशी और डॉ. निकिता गुसाई ने यह अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने मार्च 2024 से फरवरी 2025 के बीच एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) के कारण अस्पताल में भर्ती 288 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि वर्ष 2018-19 में 40 वर्ष या उससे कम आयु के मरीज कुल कार्डियक इमरजेंसी मामलों में महज 8 प्रतिशत से कुछ अधिक थे, जबकि कोरोना के बाद यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 21 प्रतिशत तक पहुंच गया।
शराब और डायबिटीज ने बढ़ाई चिंता
अध्ययन में युवाओं के बीच बढ़ते लाइफस्टाइल और मेटाबॉलिक जोखिमों को गंभीर कारण माना गया है। 40 वर्ष से कम उम्र के प्रभावित मरीजों में शराब सेवन का प्रतिशत लगभग 26.4 प्रतिशत से बढ़कर 50.7 प्रतिशत से अधिक हो गया। वहीं टाइप-2 डायबिटीज के मामलों में चार गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह आंकड़ा 10.3 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया। तंबाकू और गुटखा सेवन भी बड़ी संख्या में युवा मरीजों में पाया गया।
बैठे रहने की आदत और नशा बन रहे जानलेवा
विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना के बाद लंबे समय तक बैठे रहकर काम करने की आदत, शारीरिक गतिविधि में कमी, अनियमित खान-पान, तनाव और नशीले पदार्थों का बढ़ता उपयोग युवाओं के हृदय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। मोटापा, धूम्रपान और अन्य प्रकार के नशे की आदत युवा हार्ट अटैक मरीजों में अपेक्षाकृत अधिक देखी गई। चिकित्सकों का कहना है कि इन जोखिम कारकों का एक साथ मौजूद होना रक्त वाहिकाओं को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है।
सीने में तेज दर्द को नजरअंदाज न करें
क्लीनिकल अध्ययन में यह भी सामने आया कि अधिकांश युवा मरीज तेज या दबाव जैसे सीने के दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंचे। एंजियोग्राफी में करीब 41 प्रतिशत मरीजों में एक प्रमुख रक्त वाहिका में ब्लॉकेज पाई गई। डॉक्टरों का कहना है कि सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी या अचानक बेचैनी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
रोज 30 मिनट व्यायाम और समय-समय पर जांच जरूरी
चिकित्सा विशेषज्ञों ने युवाओं से प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने, धूम्रपान, तंबाकू और शराब जैसे नशीले पदार्थों से दूरी बनाने तथा संतुलित आहार अपनाने की अपील की है। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें विशेष रूप से नियमित रक्तचाप, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य आवश्यक हृदय संबंधी जांच करानी चाहिए।
यह अध्ययन साफ संकेत देता है कि हार्ट अटैक और गंभीर हृदय रोग अब केवल अधिक उम्र की समस्या नहीं रह गए हैं। स्वस्थ जीवनशैली, समय पर जांच और शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेना ही युवाओं को बढ़ते हृदय संबंधी जोखिम से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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