दुर्ग/छत्तीसगढ़
दुर्ग पुलिस द्वारा एन.डी.पी.एस. एक्ट के मामलों में विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जप्ती, सैंपलिंग, एफ.एस.एल. परीक्षण, चेन ऑफ कस्टडी और न्यायालयीन अपेक्षाओं के अनुरूप साक्ष्य संकलन पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया।
विधिसम्मत विवेचना पर फोकस
एन.डी.पी.एस. एक्ट के अंतर्गत प्रकरणों को अधिक प्रभावी, सुदृढ़ और कानूनसम्मत बनाने के उद्देश्य से 7 फरवरी 2026 को पुरानी पुलिस लाइन, दुर्ग स्थित दधीचि प्रशिक्षण हाल में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विवेचकों को अद्यतन विधिक प्रावधानों, प्रक्रियात्मक सावधानियों और न्यायालयीन दृष्टिकोण से अवगत कराना रहा, ताकि जांच में तकनीकी त्रुटियों की गुंजाइश कम हो और मामलों की सफलता दर बढ़े।
वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायिक मार्गदर्शन
प्रशिक्षण में पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज श्री अभिषेक शांडिल्य ने केस-स्टडी के माध्यम से विवेचना की गुणवत्ता पर जोर देते हुए विधिसम्मत कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल ने नशीली टेबलेट व कैप्सूल से जुड़े मामलों में सावधानियों और प्रभावी जांच तकनीकों पर प्रकाश डाला। विशेष न्यायाधीश (एन.डी.पी.एस.) श्रीमती सुनीता टोप्पो और न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री रवि कश्यप ने सूक्ष्म साक्ष्यों, दस्तावेजी शुद्धता और न्यायालयीन अपेक्षाओं के अनुरूप जांच प्रक्रिया पर मार्गदर्शन दिया।
वैज्ञानिक प्रक्रिया, चेन ऑफ कस्टडी और अभियोजन मजबूती
डिप्टी डायरेक्टर (प्रॉसिक्यूशन) श्री भीम सिंह राजपूत ने धारा 50, 55, 57 और 29 एन.डी.पी.एस. एक्ट के अनुपालन, जप्त माल की सुरक्षित अभिरक्षा और शीघ्र एफ.एस.एल. परीक्षण की अनिवार्यता समझाई। एफ.एस.एल. भिलाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी श्री पंकज ताम्रकार ने सैंपलिंग प्रक्रिया, त्रुटिरहित दस्तावेजीकरण और ओवरराइटिंग से बचने पर प्रशिक्षण दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री मणिशंकर चन्द्रा ने चेन ऑफ कस्टडी, बहु-आरोपी प्रकरणों और विवेचना के दौरान संपूर्ण विवरण के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न थानों से लगभग 75 पुलिस अधिकारी एवं विवेचक शामिल हुए।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने सभी विवेचकों से एन.डी.पी.एस. एक्ट के मामलों में विधिक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करने की अपील की, ताकि दोषियों को प्रभावी दंड दिलाया जा सके और समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
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