नई दिल्ली /भारत
हाइलाइट :
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ को रद्द करने के साथ रूसी तेल पर ‘प्रतिबद्धता’ का दावा सामने आया है। पूर्व राजनयिकों ने इसे अमेरिकी दादागिरी करार दिया है, जबकि नई दिल्ली ने आधिकारिक तौर पर इन दावों का खंडन नहीं किया।
टैरिफ हटाने की शर्तें और विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त 2025 में भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ को रद्द करते हुए दावा किया कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद लेने की प्रतिबद्धता जताई है। यह दावा भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर जारी संयुक्त बयान के साथ एक कार्यकारी आदेश में किया गया। आदेश में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि भारत रूसी तेल आयात फिर शुरू करता है तो टैरिफ दोबारा लागू किए जा सकते हैं। सरकार की ओर से शनिवार (7 फरवरी, 2026) तक इस दावे का औपचारिक खंडन नहीं किया गया।
निगरानी और दबाव की राजनीति
ट्रंप ने वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक को रूसी तेल पर भारत के अनुपालन की निगरानी का निर्देश दिया है। साथ ही, ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर दंडात्मक शुल्क लगाने का अलग आदेश भी जारी किया गया। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने कहा कि व्यापार समझौते में “बाहरी भू-राजनीतिक मुद्दे” जोड़ना सरासर दादागिरी है। उन्होंने टिप्पणी की, “रूस या ईरान के साथ भारत के तेल व्यापार का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौते से कोई लेना-देना नहीं है।”
रणनीतिक स्वायत्तता और ऊर्जा सुरक्षा
पूर्व राजदूत मनजीव पुरी ने इसे वर्चस्ववादी दबाव बताते हुए भारत को बहुध्रुवीय दृष्टि और रणनीतिक स्वायत्तता पर सतर्क रहने की सलाह दी। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार बाजार की वस्तुनिष्ठ परिस्थितियों के अनुरूप स्रोतों में विविधता ला रही है। आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2025 में रूस से भारत का तेल आयात 38 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो कुल आयात का लगभग 25% रह गया है, जबकि अमेरिका से आयात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।
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