नारायणपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट :
- नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में BSF की बड़ी कार्रवाई
- कोहकामेटा थाना क्षेत्र के जंगलों से नक्सली डंप बरामद
- हथियार, विस्फोटक और संचार उपकरण जब्त
- सुरक्षा बलों ने बड़ी नक्सली साजिश नाकाम करने का दावा किया
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। BSF की 135वीं वाहिनी ने कोहकामेटा थाना क्षेत्र के टोके उपरपारा गांव के घने जंगलों में छिपाकर रखे गए नक्सली डंप का पता लगाया। जवानों ने यहां से बड़ी मात्रा में हथियार, विस्फोटक सामग्री और संचार उपकरण बरामद किए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कार्रवाई नक्सलियों की संभावित बड़ी साजिश को विफल करने में अहम साबित हुई है।
खुफिया सूचना के बाद चलाया गया विशेष अभियान
जानकारी के अनुसार, एफजीटी नारायणपुर से मिली खुफिया सूचना के आधार पर BSF की टीम ने इलाके में सर्चिंग और डीमाइनिंग ऑपरेशन शुरू किया था। जवानों ने जंगलों में कई घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद छिपाकर रखे गए नक्सली डंप का पता चला। अधिकारियों के मुताबिक, नक्सलियों ने लंबे समय से इस इलाके में हथियार और विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी थी ताकि मौके पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। सुरक्षा बलों ने पूरे अभियान के दौरान अत्यधिक सतर्कता बरती क्योंकि इलाके में आईईडी होने की आशंका भी बनी हुई थी।
हथियारों और विस्फोटकों की बड़ी खेप बरामद
बरामद सामग्री में .315 राइफल, 12 बोर राइफलें, बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, जिंदा कारतूस, डेटोनेटर, विस्फोटक सामग्री, ट्रिगर मैकेनिज्म और संचार उपकरण शामिल हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल नक्सली किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए कर सकते थे। अभियान में शामिल एक अधिकारी ने कहा कि “सुरक्षा बल लगातार जंगलों में दबाव बनाकर नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने में जुटे हैं।” इस कार्रवाई के बाद इलाके में सुरक्षा बलों की सक्रियता और बढ़ा दी गई है।
अबूझमाड़ में बढ़ रहा सुरक्षा बलों का दबाव
अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन हाल के महीनों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों से नक्सलियों की गतिविधियों पर असर पड़ा है। BSF और अन्य सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में शांति बहाल करने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे भी सघन अभियान जारी रहेंगे। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लगातार कार्रवाई से नक्सली नेटवर्क कमजोर पड़ रहा है और उनके संसाधनों पर बड़ा असर पड़ रहा है।
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