स्वतंत्र छत्तीसगढ़
- 800 से ज्यादा शराब दुकानों में सप्लाई प्रभावित
- देसी और सस्ती अंग्रेजी शराब का स्टॉक तेजी से खत्म
- प्लास्टिक बोतलों में शराब सप्लाई की नई नीति बनी संकट की वजह
- सरकार को रोजाना 40-50 करोड़ रुपए तक राजस्व नुकसान का अनुमान
- 31 मई के बाद लापरवाही करने वाले डिस्टिलर्स पर लाइसेंस सस्पेंड की कार्रवाई
- रायपुर समेत कई जिलों में लोकप्रिय ब्रांड्स की भारी कमी
प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री का फैसला बना बड़ी परेशानी
Chhattisgarh में शराब बिक्री व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गई नई नीति अब आबकारी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। राज्य सरकार द्वारा पीईटी प्लास्टिक बोतलों में शराब सप्लाई लागू करने के फैसले के बाद प्रदेशभर की शराब दुकानों में देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की भारी कमी देखने को मिल रही है। कई दुकानों में लोकप्रिय ब्रांड्स का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नई व्यवस्था को बिना पूरी तैयारी के लागू करने से डिस्टिलर्स, सप्लायर्स और विभागीय अधिकारियों के बीच समन्वय बिगड़ गया है। इसका असर सीधे शराब सप्लाई चेन पर दिखाई दे रहा है।
1 अप्रैल से लागू हुआ नया नियम, डिस्टिलरियों में मचा हड़कंप
आबकारी विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से राज्य की सभी डिस्टिलरियों को प्लास्टिक यानी पीईटी बोतलों में शराब बॉटलिंग करने का आदेश दिया था। सरकार का दावा था कि इससे शराब में मिलावट रोकी जा सकेगी और ट्रैकिंग सिस्टम बेहतर होगा। लेकिन अचानक लागू किए गए इस फैसले ने शराब कारोबारियों और बॉटल सप्लायर लॉबी में हड़कंप मचा दिया। कई डिस्टिलरियों के पास पर्याप्त प्लास्टिक बोतलें उपलब्ध नहीं थीं। वहीं तकनीकी मशीनों में बदलाव और नई पैकेजिंग व्यवस्था तैयार नहीं होने के कारण कई यूनिट्स में उत्पादन और बॉटलिंग तक बंद करनी पड़ी।
कोर्ट पहुंचा मामला, सरकार को बदलना पड़ा फैसला
नई शराब नीति के विरोध में कई कारोबारी कोर्ट पहुंच गए। दूसरी तरफ बाजार में शराब की सप्लाई तेजी से प्रभावित होने लगी। हालात बिगड़ने के बाद आबकारी विभाग को दोबारा आदेश जारी कर 31 मई तक कांच की बोतलों में शराब सप्लाई की अनुमति देनी पड़ी। इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। लगभग 10 दिनों तक कई डिस्टिलरियों में उत्पादन बंद रहने के कारण पुराने स्टॉक खत्म हो गए और अब शराब दुकानों तक मांग के मुकाबले काफी कम सप्लाई पहुंच रही है।
रायपुर समेत कई जिलों में शराब की भारी कमी
Raipur सहित प्रदेश के कई जिलों में शराब दुकानों पर स्टॉक संकट गहराता जा रहा है। देसी शराब और लो-कॉस्ट अंग्रेजी ब्रांड्स की मांग सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। कई दुकानों में ग्राहकों को पसंदीदा ब्रांड नहीं मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, डिस्टिलर्स और बॉटल सप्लाई लॉबी जानबूझकर सप्लाई प्रक्रिया धीमी कर रही है। इससे सरकार और विभाग दोनों पर दबाव बढ़ गया है।
सरकार को रोजाना करोड़ों रुपए का नुकसान
आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक Chhattisgarh में रोजाना करीब 70 करोड़ रुपए की शराब बिक्री होती है। लेकिन सप्लाई बाधित होने से राज्य सरकार को प्रतिदिन 40 से 50 करोड़ रुपए तक के राजस्व नुकसान की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो राज्य के आबकारी राजस्व लक्ष्य पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
आबकारी आयुक्त ने दी सख्त चेतावनी
आबकारी आयुक्त Padum Elma ने कहा कि विभाग लगातार डिस्टिलर्स और सप्लायरों की बैठक ले रहा है। फिलहाल प्लास्टिक और कांच दोनों बोतलों में सप्लाई जारी रखने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि 15 मई से प्लास्टिक बोतलों में सप्लाई बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। कई डिस्टिलर्स ने रिफिलिंग सिस्टम में बदलाव भी कर लिया है। आयुक्त ने साफ चेतावनी दी कि 31 मई के बाद सप्लाई में लापरवाही बरतने वाले डिस्टिलर्स का लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा।
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