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शासकीय अग्रसेन महाविद्यालय, बिल्हा में “भारतीय भाषा परिवार” पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न …

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बिल्हा /छत्तीसगढ़

शासकीय अग्रसेन महाविद्यालय, बिल्हा में भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली के प्रायोजन से आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों ने भारतीय भाषाओं की चेतना, परंपरा और समकालीन भूमिका पर विचार रखे। उद्घाटन सत्र में अकादमिक विमर्श के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

शुभारंभ और उद्घाटन सत्र

बिल्हा, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) स्थित शासकीय अग्रसेन महाविद्यालय में 28 जनवरी 2026 से “भारतीय भाषा परिवार” विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती एवं महाराजा अग्रसेन जी की पूजा-अर्चना, दीप प्रज्वलन तथा छत्तीसगढ़ राज्यगीत के साथ हुआ। मुख्य अतिथि आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी, कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपने उद्बोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि भारतीय भाषाएं छात्रों को जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने “पांच कोस में पानी, दस कोस में बानी” की कहावत के माध्यम से भारत की भाषाई विविधता को सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक बताया।

अकादमिक विमर्श और विचार प्रस्तुतियाँ

मुख्य वक्ता प्रो. चितरंजन कर ने भाषा को चेतना और संस्कृति का आधार बताते हुए कहा कि साहित्य भाषा की आत्मा है और भाषा आत्मा में बसती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि केवल अंक नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की क्षमता ही विद्यार्थी की वास्तविक पहचान है। इस अवसर पर संगोष्ठी के स्मारिका (Souvenir) का विमोचन किया गया। प्रो. नीलाद्रि शेखर दाश ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में भारतीय भाषाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. रामास्वामी सुब्रमणि, डॉ. संजय अनंत, प्रो. वाराप्रसाद कोल्ला और डॉ. उमाशंकर पांडेय ने भारतीय भाषाओं के विकास, विज्ञान और एकरूपता पर अपने विचार साझा किए। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. आई.डी. तिवारी ने कहा कि भाषा राष्ट्र-निर्माण का सृजनात्मक उपकरण है।

सांस्कृतिक संध्या और सहभागिता

दिन के सत्रों के उपरांत आयोजित सांस्कृतिक संध्या में प्रो. स्वाति चंदोरकर के निर्देशन में कलासेतु टीम, शासकीय महाविद्यालय नरसिंहपुर (मध्यप्रदेश) द्वारा मंचित नाटक “कैकेयी” विशेष आकर्षण रहा। विद्यार्थियों द्वारा बहुभाषी गीत, कविताएं और लोकनृत्य प्रस्तुत कर भारत की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. (श्रीमती) सावित्री त्रिपाठी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री सतीश शर्मा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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