रिपोर्ट : राखी श्रीवास्तव
भाजपा में युवा नेतृत्व का बड़ा प्रयोग | बिहार से राष्ट्रीय राजनीति तक नितिन नवीन की यात्रा | कायस्थ समाज के लिए प्रतिनिधित्व और आत्मविश्वास का क्षण
रायपुर : भारतीय जनता पार्टी द्वारा नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में आगे बढ़ाया जाना केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि देश की राजनीति में पीढ़ीगत संक्रमण का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। 45 वर्ष की आयु में विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी की कमान संभालना भाजपा की उस रणनीति को रेखांकित करता है, जिसमें अनुभव के साथ युवा ऊर्जा को निर्णायक भूमिका दी जा रही है। जेपी नड्डा के बाद पार्टी की बागडोर संभालने जा रहे नितिन नवीन को 12वें और सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संगठन के भीतर और बाहर दोनों जगह नई अपेक्षाएँ जन्म लेती हैं।
कायस्थ समाज के लिए प्रतीकात्मक उपलब्धि
ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव ने बताया नितिन नवीन का उभार कायस्थ समाज के लिए विशेष महत्व रखता है, जिसे परंपरागत रूप से बौद्धिक, प्रशासनिक और वैचारिक रूप से सशक्त वर्ग माना जाता रहा है। लंबे अंतराल के बाद इस समाज से आने वाले नेता का राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दायित्व तक पहुँचना यह संदेश देता है कि संख्या नहीं, बल्कि योग्यता, निष्ठा और संगठनात्मक क्षमता निर्णायक बन रही है। जनसंघ से लेकर भाजपा तक कायस्थ समाज की वैचारिक भागीदारी रही है। नितिन नवीन के पिता, स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा, बिहार भाजपा के मजबूत स्तंभों में गिने जाते थे—और पुत्र ने उसी विरासत को राष्ट्रीय फलक पर स्थापित किया है।
राजनीतिक निहितार्थ और आगे की राह
देश की राजनीति में भाजपा के विश्वसनीय वैचारिक आधार के रूप में पहचाने जाने वाले कायस्थ समाज ने बीते दशकों में प्रशासन और शिक्षा को प्राथमिकता दी, पर अब राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई मुखरता दिख रही है। नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना इस समाज के लिए अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित करने का अवसर है, वहीं भाजपा के लिए यह ‘युवा और आधुनिक भारत’ की सोच को संस्थागत रूप देने का कदम माना जा रहा है। 20 जनवरी 2026 को वे सबसे युवा अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड स्थापित करने जा रहे हैं, जो संगठन की दीर्घकालिक रणनीति और नेतृत्व विकास मॉडल को नई दिशा देता है।
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