रायपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स
रायपुर पुलिस ने 50 लाख 35 हजार रुपये कैश के साथ 4 ऑनलाइन सटोरियों को गंज थाना क्षेत्र के सिंधु भवन पार्किंग से गिरफ्तार किया, आरोपी बेटिंग साइट्स की मास्टर ID से सट्टा संचालन व ID बिक्री करते थे, बैंक खातों में करोड़ों रुपये होल्ड कराए गए, लैपटॉप, मोबाइल, कार, पासपोर्ट सहित 80 लाख रुपये का सामान जब्त, छत्तीसगढ़ जुआ निषेध अधिनियम 2022 व IT एक्ट की धाराओं में केस दर्ज।
पुलिस इनपुट और ऑपरेशन का खाका
रायपुर पुलिस को शुक्रवार दोपहर गंज थाना क्षेत्र में चल रहे एक संगठित ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क की पुख्ता सूचना मिली, जिसके बाद IG अमरेश मिश्रा के निर्देशन में एंटी-क्राइम एंड साइबर यूनिट और गंज पुलिस ने सिंधु भवन पार्किंग स्थित सिंधु भवन के पास घेराबंदी की। टीम ने चारों आरोपियों—खम्हारडीह निवासी रितेश गोविंदानी (32), मौदहापारा निवासी मोहम्मद अख्तर (32), डीडी नगर निवासी विक्रम राजकोरी (32) और पुरानी बस्ती निवासी सागर पिंजानी (30)—को एक कार से ऑनलाइन बेटिंग का संचालन करते हुए दबोच लिया। शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को उलझाने की कोशिश की, लेकिन कड़ाई से हुई पूछताछ में उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई शहर में डिजिटल सट्टा नेटवर्क पर अब तक की सबसे प्रभावी और बड़ी घेराबंदी में से एक रही। स्थानीय पार्किंग में मौजूद एक गार्ड ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम रोज गाड़ियां देखते हैं, लेकिन ये मामला तो पूरी फिल्म जैसा था। पुलिस को सलाम।”
मास्टर ID से लेकर साइट नेटवर्क तक का खुलासा
पुलिस के सामने आरोपियों ने बताया कि वे Allpanelexch.com, Power7777.com, Powerexch.com और Classicexch99.com जैसी बेटिंग साइट्स की मास्टर ID का इस्तेमाल कर ऑनलाइन सट्टा खिलाते थे, और इन्हीं प्लेटफॉर्म्स की बेटिंग ID शहर-प्रदेश के कई हिस्सों में बेच भी चुके हैं। SSP डॉ. लाल उमेद सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि आरोपियों के बैंक खातों में जमा करोड़ों रुपये को फिलहाल होल्ड कराया गया है, ताकि सट्टा नेटवर्क की आगे की फंड-ट्रेल जांच में कोई बाधा न आए। कैश के अलावा लैपटॉप, 8 मोबाइल फोन, पासपोर्ट, एटीएम कार्ड, चेक-बुक, कैलकुलेटर और सट्टा संचालन में प्रयुक्त कार समेत 80 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि मास्टर ID आधारित नेटवर्क में एक मुख्य संचालक के जरिए सैकड़ों सब-ID एक्टिव रहती हैं, जिससे कम समय में बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन संभव हो जाता है। पुलिस अब ID खरीदने वालों और सट्टा खेलने वालों की भी सूची खंगाल रही है। डीडी नगर के एक स्थानीय दुकानदार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “युवाओं को इस दलदल से बचाना जरूरी है, पुलिस का यह कदम उम्मीद जगाता है।”
कानूनी धाराएं, आगे की जांच और सामाजिक प्रभाव
SSP डॉ. सिंह के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ निषेध अधिनियम 2022 की धारा 7, 112(2) BNS और IT एक्ट की धारा 66(C) के तहत गंज पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का फोकस अब केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के इको-सिस्टम—ID सप्लायर, यूजर्स, मनी-लॉन्ड्रिंग एंगल और अंतर-राज्यीय कनेक्शन—को ट्रेस करने पर है। जानकार बताते हैं कि डिजिटल सट्टा प्लेटफॉर्म्स की ID बिक्री एक संगठित अपराध की श्रेणी में आती है, जिसमें आर्थिक अपराध के साथ-साथ सामाजिक नुकसान भी गंभीर होता है। इस केस ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि ऑनलाइन सट्टा कैसे मध्यमवर्गीय परिवारों को चुपचाप आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल देता है। जांच एजेंसियां अब सर्विलांस, IP ट्रैकिंग, बैंक ट्रांजैक्शन मैपिंग और सोशल नेटवर्क लिंक-विश्लेषण के जरिए मामले की परतें खोलेंगी।
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