बस्तर/छत्तीसगढ़
बस्तर रेंज के बीजापुर और सुकमा जिलों में सुरक्षाबलों ने खुफिया सूचना के आधार पर समन्वित एंटी-नक्सल ऑपरेशन लॉन्च किया, जिसमें DRG, CRPF, STF और कोबरा बटालियन की संयुक्त टुकड़ियां शामिल रहीं। घने जंगल और पहाड़ी इलाकों में हुई आमने-सामने की मुठभेड़ों में 14 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज किया गया। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई नक्सल कैडर की रणनीतिक मौजूदगी को कमजोर करने और अंदरूनी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रहार है। ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी, ड्रोन-आधारित निगरानी और टैक्टिकल ग्रिड मूवमेंट का इस्तेमाल किया, जिससे नक्सलियों को भागने का सीमित अवसर मिला।
मुठभेड़स्थल से हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों की बड़ी खेप जब्त की गई, जिनमें AK-47, SLR, INSAS, डेटोनेटर, प्रेशर-कुकर IED, वायर-बंडल और नक्सली साहित्य शामिल बताए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों की बरामदगी यह संकेत देती है कि नक्सली किसी बड़े हमले की तैयारी में थे, जिसे सुरक्षाबलों की सक्रिय रणनीति ने नाकाम कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि सभी जब्त हथियारों की फॉरेंसिक जांच कर उनके स्रोत और सप्लाई-चेन की पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक आकलन में यह भी सामने आया है कि न्यूट्रलाइज किए गए नक्सलियों में कुछ क्षेत्रीय कमांड-लेवल ऑपरेटिव शामिल हो सकते हैं, जो स्थानीय भर्ती और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन में भूमिका निभा रहे थे।
क्षेत्रीय प्रभाव और आगे की दिशा: इस सफलता को बस्तर में सुरक्षा अभियानों के बढ़ते प्रभाव और नक्सल विरोधी दबाव-रणनीति की परिणति के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने भी अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाल के महीनों में सुरक्षाबलों की मौजूदगी और भरोसा बढ़ा है, जिससे भय-आधारित नियंत्रण का नक्सली मॉडल कमजोर पड़ रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह ऑपरेशन सिर्फ एक टैक्टिकल जीत नहीं, बल्कि बस्तर की सुरक्षा संरचना में आ रहे गुणात्मक बदलाव का संकेत भी है, जिसमें सटीक खुफिया, स्थानीय फोर्स की अगुवाई और तकनीकी बढ़त निर्णायक भूमिका निभा रही है। सुरक्षाबलों ने स्पष्ट किया है कि अभियान जारी रहेगा और इलाके में कॉम्बिंग, एरिया-डॉमिनेशन और सामुदायिक सुरक्षा-विश्वास निर्माण पर समानांतर फोकस रखा जाएगा।
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