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जशपुर जम्बूरी 2025 जहां प्रकृति की गोद में झूमी जनजातीय संस्कृति और रोमांच की धड़कनें…

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जशपुर के खूबसूरत जंगलों और वादियों में चार दिन से चल रहा है ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ । देशभर से आए पर्यटक यहां जनजातीय लोकनृत्यों , स्वादिष्ट व्यंजनों और रोमांचक खेलों के बीच प्रकृति के साथ एक अद्भुत रिश्ता महसूस कर रहे हैं । यह आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है , बल्कि स्थानीय युवाओं के जीवन में नई उम्मीदें भी जगा रहा है ।

रायपुर , 08 नवंबर 2025 – जशपुर की हरी-भरी वादियाँ इन दिनों उत्सव के रंगों में रंगी हैं । हवा में ढोल-नगाड़ों की थाप , स्थानीय गीतों की मधुर गूंज और सैकड़ों पर्यटकों की मुस्कानें… सब मिलकर ‘जशपुर जम्बूरी 2025’ को एक यादगार पर्व बना रहे हैं । चार दिन तक चलने वाले इस आयोजन में देशभर से आए 120 से अधिक पर्यटकों ने प्रकृति और संस्कृति का अनोखा संगम देखा । शुरुआत नीमगांव से हुई , जहां प्रतिभागियों ने पक्षी दर्शन Bird Watching करते हुए शांत वातावरण में प्रकृति की आवाज़ सुनी । झरनों की कलकल और पक्षियों की चहचहाहट ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया । इसके बाद उत्सव ने रोमांचक मोड़ लिया । मयाली में पर्यटकों ने कयाकिंग , एटीवी राइड , एक्वा साइकिलिंग और पेंटबॉल जैसे साहसिक खेलों में हिस्सा लिया , तो देशदेखा में दूसरे समूह ने रॉक क्लाइंबिंग , जुमारिंग , बोल्डरिंग और ज़िपलाइनिंग का रोमांच महसूस किया । कई प्रतिभागियों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए “ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत एडवेंचर” साबित हुआ ।

सांस्कृतिक रंगों में डूबा जशपुर

मधेश्वर पहाड़ की पवित्र घाटी में शाम होते ही सरना एथनिक रिज़ॉर्ट में जनजातीय कलाकारों का उत्साह देखते ही बनता था । ढोल की थाप पर थिरकते नर्तक और पारंपरिक पोशाकों में सजे कलाकारों ने “जशपुर की आत्मा” को मंच पर जीवंत कर दिया । स्थानीय व्यंजनों – जैसे कोदो-कुटकी का भात और अरसा-पुए – की खुशबू ने पर्यटकों के मन मोह लिए । भोपाल से आई पर्यटक नेहा शर्मा ने मुस्कुराते हुए कहा , “यहां की शांति और लोगों का अपनापन दिल को छू गया । ऐसा लगा जैसे समय ठहर गया हो ।” वहीं एक स्थानीय युवक राहुल एक्का ने बताया , “इस उत्सव से हमें काम और पहचान दोनों मिले हैं । पहले गांव में रोजगार की कमी थी , अब सैलानियों के आने से उम्मीद जगी है ।

जशपुर की हरियाली में साहसिक खेलों और लोक संस्कृति का आनंद लेते पर्यटक – जशपुर जम्बूरी 2025 के दौरान।

तारों के नीचे यादें और उम्मीदें

आखिरी रात सभी पर्यटक चमकीले आसमान के नीचे कैम्पफायर के आसपास बैठे । ढेर सारी हंसी , गीतों की धुन और साझा अनुभवों ने इस यात्रा को भावनात्मक रंग दे दिया । किसी ने गिटार बजाया , तो किसी ने अपने कैमरे से जशपुर की खूबसूरती को कैद किया ।

पर्यटन को नई दिशा

यह आयोजन न केवल पर्यटन को गति दे रहा है , बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोल रहा है । पर्यटन विभाग का मानना है कि ऐसे आयोजन से छत्तीसगढ़ का ग्रामीण इलाका राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उभर कर सामने आ रहा है । एक अधिकारी ने कहा , “जशपुर की पहचान अब सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं , बल्कि यह अब संस्कृति , साहस और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक बन गया है ।”

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