स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल न्यूज़ डेस्क
मुख्य बिंदु
- कांकेर जिले में 21 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
- मुख्यमंत्री साय बोले – “विकास की राह ही भविष्य का सही विकल्प”
- ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ बनीं बदलाव की मिसाल
- डबल इंजन सरकार का लक्ष्य — 31 मार्च 2026 तक भारत को बनाना नक्सलमुक्त राष्ट्र

कांकेर में आत्मसमर्पण करते नक्सली — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, बस्तर में लौट रही है स्थायी शांति और विकास की धारा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में माओवाद की समाप्ति अब वास्तविकता बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की जनोन्मुख पहल “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” ने बस्तर के जंगलों में शांति, विश्वास और विकास की नई बयार ला दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि रविवार को कांकेर जिले में 21 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया, जो राज्य में चल रही ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025’ और ‘नियद नेल्ला नार योजना’ की सफलता का ठोस प्रमाण है।
विकास की राह ही भविष्य का विकल्प: मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद की भ्रामक विचारधारा से भटके हुए युवा अब यह समझने लगे हैं कि बंदूक नहीं, विकास की राह ही स्थायी समाधान है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए पुनर्वास, पुनर्प्रशिक्षण और सम्मानजनक पुनर्संस्थापन की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
साय ने कहा, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आत्मसमर्पित नक्सली न केवल सुरक्षित जीवन जिएं बल्कि वे समाज के प्रेरक उदाहरण बनें।”
केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में बदल रहा बस्तर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के लोगों का विश्वास और भरोसा जीता है। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र की ‘डबल इंजन सरकार’ की प्रतिबद्धता से माओवादी संगठन अब कमजोर पड़ चुके हैं और बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति अपना रहे हैं।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि “बस्तर अंचल में अब नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है, और यहाँ के गाँव तेजी से विकास और सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
नक्सलमुक्त भारत का लक्ष्य: 31 मार्च 2026 तक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलमुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और जल्द ही बस्तर से लेकर सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर तक स्थायी शांति स्थापित होगी।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “अब बंदूक की जगह किताबें, शिक्षा और विकास की आवाज़ गूंजेगी — यही नया बस्तर, नया छत्तीसगढ़ और नया भारत है।”


