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Wednesday, February 11, 2026

क्या आदिवासी सशक्तिकरण की नई मिसाल बना रहा है छत्तीसगढ़? राष्ट्रपति से मिला राष्ट्रीय सम्मान बना मील का पत्थर…

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छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय पटल पर फिर दर्ज की दमदार उपस्थिति

छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सामाजिक विकास और जनजातीय सशक्तिकरण के क्षेत्र में देशभर में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ और प्रधानमंत्री जनमन योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया। राज्य सरकार की ओर से यह सम्मान प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने प्राप्त किया।

जनजातीय विकास की नई दिशा

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में जनजातीय समुदायों, विशेषकर पिछड़ी जनजातियों के जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों की विस्तृत प्रस्तुति दी।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने जिलों में हो रहे जमीनी कार्यों की जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैसे शासन की योजनाएं दूरस्थ अंचलों तक पहुँच रही

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कई जिलों को मिला विशेष सम्मान

छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों ने भी इस अवसर पर अपनी उपलब्धियों से राज्य का गौरव बढ़ाया—

  • मोहला-मानपुर, बालोद, दंतेवाड़ा और धमतरी को ‘स्क्रीन फेलिसिटेशन अवार्ड’
  • धमतरी और कोरिया जिलों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान
  • जनजाति विभाग के स्टेट ट्रेनर ललित शुक्ला को व्यक्तिगत श्रेणी में पुरस्कार

इस दौरान धमतरी कलेक्टर अविनाश मिश्रा, कोरिया कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, बालोद कलेक्टर दिव्या मिश्रा और दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत भी मौजूद रहे।

नेतृत्व की सराहना – राज्य ने मनाया कर्मयोगियों का सम्मान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर समस्त विभागीय अधिकारियों और फील्ड टीम को बधाई देते हुए कहा—
“यह सम्मान उन कर्मयोगियों की निष्ठा और परिश्रम की पहचान है, जिन्होंने जनजातीय सशक्तिकरण को धरातल पर साकार किया है।”

आदिम जाति विकास मंत्री राम विचार नेताम ने कहा कि यह गौरव उन जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों का है, जिन्होंने राज्य के दूरस्थ गाँवों तक विकास की रोशनी पहुँचाने में दिन-रात मेहनत की है।

छत्तीसगढ़ मॉडल: एक प्रेरणा

छत्तीसगढ़ का यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल राज्य की उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन किस प्रकार जनजीवन बदल सकता है।
आज जब देश आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, तब छत्तीसगढ़ ने यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति, नीति और निष्ठा मिलकर एक नया सामाजिक बदलाव रच सकते हैं।

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