29.1 C
Raipur
Friday, February 13, 2026

अपोलो हॉस्पिटल के चार डॉक्टरों को बड़ी राहत : हाईकोर्ट ने 7 साल पुराना एफआईआर और चार्जशीट किया निरस्त…

HomeChhattisgarhअपोलो हॉस्पिटल के चार डॉक्टरों को बड़ी राहत : हाईकोर्ट ने 7...

Date:

बिलासपुर :07 अक्टूबर 2025 — छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के चार डॉक्टरों को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत में पेश की गई चार्जशीट दोनों को निरस्त कर दिया।

यह मामला वर्ष 2016 का है, जब दयालबंद निवासी एक युवक की अपोलो हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर सरकंडा थाने में डॉक्टरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304A (गैर इरादतन हत्या) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

मामला कैसे शुरू हुआ
25 दिसंबर 2016 को मरीज को गंभीर स्थिति में अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान अगले ही दिन 26 दिसंबर को उसकी मृत्यु हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर को मृत्यु का कारण बताया गया था। वहीं, विसरा जांच में किसी भी तरह के जहरीले पदार्थ या सल्फास के अवशेष नहीं पाए गए। इसके बावजूद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

मेडिकल बोर्ड ने दी थी क्लीन चिट
डॉक्टरों की ओर से सीनियर एडवोकेट सुनील ओटवानी ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इस मामले में पहले सिम्स और बाद में राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच की गई थी। कार्डियोलॉजिस्ट समेत पांच विशेषज्ञों के इस बोर्ड ने 2023 में अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि डॉक्टरों की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है।

पुलिस ने अलग रिपोर्ट के आधार पर किया केस दर्ज
बोर्ड की रिपोर्ट के बावजूद, पुलिस ने अपने मेडिको-लीगल विशेषज्ञ की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों पर केस दर्ज किया था। उस रिपोर्ट में यह जरूर उल्लेख था कि मरीज का मृत्युपूर्व बयान रिकॉर्ड नहीं किया गया और राइस ट्यूब को संरक्षित नहीं रखा गया, परंतु यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इन बातों का मरीज की मृत्यु से कोई सीधा संबंध था।

हाई कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि जब विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड ने डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी थी और मृत्यु का कारण मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर पाया गया था, तो इस मामले में लापरवाही का आरोप न्यायसंगत नहीं है। अतः न्यायालय ने इसे चिकित्सा पेशे से जुड़े मामलों में ‘अनुचित अभियोजन’ करार देते हुए एफआईआर और चार्जशीट दोनों को निरस्त कर दिया।

स्वतंत्र छत्तीसगढ़
स्वतंत्र छत्तीसगढ़https://swatantrachhattisgarh.com
(संपादक) इस साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी । स्वतंत्र छत्तीसगढ़ इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। स्वतंत्र छत्तीसगढ़ में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वतंत्र छत्तीसगढ़ या उसके स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्याय क्षेत्र रायपुर होगा ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related