स्वतंत्र छत्तीसगढ़
रायपुर : 03 अक्टूबर 25— छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले की जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ा खुलासा किया है। बीते शुक्रवार को CBI ने इस मामले में पाँच आरोपियों—पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, पीएससी के पूर्व सचिव और रिटायर्ड IAS जीवनलाल ध्रुव, उनके बेटे सुमित ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आदिल—को गिरफ्तार किया था। इसके बाद सोमवार (29 सितंबर) को 2000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में पेश की गई।
CBI की जांच में सामने आया कि 2021 की मुख्य परीक्षा का प्रश्न पत्र वर्ष 2020 में ही लीक हो गया था। यह पर्चा तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक ने पीएससी सचिव जीवनलाल ध्रुव के माध्यम से बाहर करवाया। आरोप है कि इस लीक प्रश्न पत्र का इस्तेमाल आयोग के चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए किया।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक, टामन सिंह सोनवानी के दत्तक पुत्र नीतेश सोनवानी और बहू निशा कोसले इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हुए थे, फिर भी चयन सूची में उनके नाम आए। वहीं, टामन के बड़े भाई की बहू दीपा आदिल का चयन आबकारी अधिकारी के रूप में हुआ। चार्जशीट बताती है कि दीपा ने आवेदन पत्र में पति का नाम जानबूझकर खाली छोड़ा, लेकिन वैवाहिक स्थिति में ‘हां’ अंकित किया।
CBI के अनुसार, परीक्षा से पहले टामन ने नीतेश, निशा, साहिल और दीपा को प्री और मेन्स परीक्षा का प्रश्न पत्र उपलब्ध कराया था। इन चारों ने मिलकर तैयारी की और परिणाम पहले से तय कर लिए गए थे। टामन के भतीजे विनीत और श्वेता के चैट से इसका खुलासा हुआ कि चयन की पूरी रूपरेखा पहले से बनी हुई थी।
सबसे बड़ा सवाल उस रजिस्टर से उठता है जो CBI को आरती वासनिक से मिला। इसमें प्रश्न पत्र तैयार करने वाले मॉडरेटरों के नाम दर्ज थे—प्रो. डॉ. बीपी यादव, प्रो. जेएल भारद्वाज, ज्ञानेंद्र शुक्ला, डॉ. सीमा खान, डॉ. नीरज झा और डॉ. आरएल दवे। लेकिन कई मॉडरेटरों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें पेपर सेट बनाने की याद नहीं है, जबकि कुछ नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में ही दर्ज नहीं थे।
CBI ने यह भी पाया कि 2020 में मुख्य परीक्षा के लिए दो अलग-अलग सेट तैयार किए गए थे। एक सेट से परीक्षा आयोजित हुई, जबकि दूसरा सेट स्ट्रॉन्ग रूम में रखने का आदेश दिया गया। लेकिन उस सेट की कोई एंट्री रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थी। यह पेपर बाद में आरती वासनिक के पास सुरक्षित रहा और इसी का उपयोग 2021 की मुख्य परीक्षा में किया गया।
इस पूरे मामले ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह अब तक का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला माना जा रहा है।
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