रायपुर : 07 सितम्बर 25 ,
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने छत्तीसगढ़ की सभी जेलों में कैदियों के लिए योग और ध्यान सत्र की शुरुआत की है। इस पहल में सुदर्शन क्रिया को भी शामिल किया गया है, जो सांस से जुड़ी एक विशेष तकनीक है। इसके लिए राज्य सरकार ने आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन की मदद ली है।
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जेलें केवल सजा का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास के केंद्र भी होनी चाहिए। इसी सोच के तहत सुबह 7:30 से 9:30 बजे तक कैदियों को योग, ध्यान और सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कराया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि इस पहल से कैदियों की दिनचर्या और मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। खासतौर पर बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जैसी नक्सल प्रभावित जिलों की जेलों में उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। हिंसा और हथियारों की राह पर चलने वाले कई कैदी अब योग और ध्यान की राह पकड़ चुके हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “हम चाहते हैं कि जेल से बाहर आने के बाद कैदी समाज पर बोझ न बनें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। योग और सुदर्शन क्रिया उन्हें नया जीवन देंगे।”
विशेषज्ञों का कहना है कि योग और ध्यान से तनाव कम होता है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह के उपाय न केवल जेलों में जीवन की गुणवत्ता सुधारेंगे, बल्कि समाज में भी सकारात्मक संदेश देंगे कि हिंसा से दूर हटकर शांति और आत्म-सशक्तिकरण की राह अपनाई जा सकती है।
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