भिलाई : 29 जुलाई 2025
आज से 29 साल पहले, 1997 में ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर से आए सफेद बाघ तरुण और तापसी ने मैत्रीबाग को नई पहचान दी। जैसे ही ये जोड़ा दो दिन की यात्रा के बाद मैत्रीबाग पहुंचा, वहां का माहौल रोमांच से भर गया। थके, भूखे और डरे हुए इन बाघों को विशेष देखरेख में रखा गया। उन्हें मंचर-7 में शिफ्ट कर शांत वातावरण में समायोजित किया गया।
विशेष संवेदनशीलता वाले इन म्यूटेंट बाघों की देखभाल चुनौतीपूर्ण रही। दो कर्मचारियों की ड्यूटी सुबह से रात तक निगरानी के लिए लगाई गई। उनकी मेटिंग और स्वाभाविक इंटरैक्शन के बाद चार महीने में दो शावकों का जन्म हुआ, जिनकी देखभाल मां की तरह की गई।
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आज मैत्रीबाग में सफेद बाघों की सातवीं पीढ़ी है। कुल 7 सफेद बाघ हैं—5 नर और 2 मादा। इनमें विक्रम और बॉबी युवाओं में खास आकर्षण का केंद्र हैं। मैत्रीबाग अन्य छह जू को सफेद बाघ दे चुका है, जिनमें लखनऊ, राजकोट, इंदौर, सतना, रायपुर और बोकारो शामिल हैं।
इनकी देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे डॉ. एन.के. जैन का इन बाघों से भावनात्मक रिश्ता है। वे कहते हैं कि शावकों की हर गतिविधि को नोट किया जाता है—पहला कदम, पहली खुराक, पहली दहाड़ तक। डॉ. जैन के पास आने पर विक्रम, सिंघम और राणा जैसे बाघ अपनापन जताते हैं, जिससे उनका गहरा जुड़ाव साफ झलकता है।
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