नई दिल्ली / भारत
Highlights
प्रधानमंत्री ने पहले ही बचत की अपील की थी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महंगाई बढ़ने की चेतावनी दी
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत पर दबाव
पेट्रोल-डीजल महंगे होने से बिगड़ सकता है आम लोगों का बजट
पश्चिम एशिया तनाव से भारत पर असर
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों में तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि कुछ जगहों पर सप्लाई संकट भी सामने आ रहा है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं।
तेल कंपनियों पर बढ़ता दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां पिछले कुछ समय से घाटे में चल रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों में ज्यादा वृद्धि नहीं की गई है, जिससे कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार और तेल कंपनियां अभी तक इस बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही हैं ताकि आम लोगों पर सीधा असर न पड़े। लेकिन अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियों के लिए नुकसान झेलना मुश्किल हो जाएगा और कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
आम आदमी की जेब पर असर
अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है, तो इसका सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ेगा। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजें, सब्जियां, दूध, ऑनलाइन डिलीवरी और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
बस और ट्रेन किराए में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे दैनिक जीवन का खर्च बढ़ जाएगा। ऐसे में आम आदमी का मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ सकता है और महंगाई का दबाव और ज्यादा महसूस होगा।
आगे क्या हो सकता है?
RBI ने साफ किया है कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अगर महंगाई बढ़ती है और हालात गंभीर होते हैं, तो केंद्रीय बैंक आवश्यक आर्थिक कदम उठा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट जल्द खत्म हो जाता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रह सकते हैं। लेकिन यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है।
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