उज्जैन : 11 जुलाई 2025
श्रावण मास की पवित्र शुरुआत शुक्रवार को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती से हुई। तड़के 3 बजे भगवान महाकाल के पट खोले गए और हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ लिया। यह मास शिवभक्ति और तपस्या का महीना माना जाता है। इस बार श्रावण में चार सोमवार होंगे और अनुमान है कि करीब 80 लाख से अधिक श्रद्धालु उज्जैन पहुंचकर महाकाल के दर्शन करेंगे।
परंपरागत विधि से भस्म आरती शुरू हुई। वीरभद्र जी के कान में स्वस्तिवाचन कर भगवान से आज्ञा ली गई। इसके बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए और भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया गया। रजत मुकुट, शेषनाग की माला, भांग, चंदन और सुगंधित पुष्पों से भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई।
पुजारी महेश जी के अनुसार श्रावण मास तप और आराधना का समय है। भक्त बिल्व पत्र, जल, भांग और चंदन अर्पित कर महाकाल का आशीर्वाद लेते हैं।
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श्रावण मास के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था बनाई गई है। सामान्य श्रद्धालुओं का प्रवेश त्रिवेणी संग्रहालय के पास से होगा। दर्शन मार्ग में नंदीद्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, टनल मंदिर परिसर, कार्तिक मंडपम और गणेश मंडपम शामिल हैं। दर्शन के बाद श्रद्धालु निर्माल्य द्वार या आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकल सकेंगे।
प्रशासन द्वारा सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, शौचालय और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्वक और व्यवस्थित रूप से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। उज्जैन में श्रावण मास के पहले ही दिन आस्था का अभूतपूर्व माहौल देखने को मिला।
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