डोंगरगढ़: 10 जुलाई 2025
डोंगरगढ़। विश्व प्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी मंदिर की पहाड़ी पर सोमवार सुबह एक चौंकाने वाली घटना घटी, जब पहली बार विशाल चट्टान खिसककर गिर गई। इस हादसे से जहां श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई, वहीं पर्यावरणीय असंतुलन और अवैज्ञानिक निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चट्टान गिरने से कई बड़े पेड़ धराशायी हो गए और दर्शन के लिए बनी नई सीढ़ियों का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे पहाड़ी का पिछला मार्ग बाधित हो गया। स्थानीय निवासी मान बाई नेताम ने बताया कि हादसे के वक्त तेज गर्जना जैसी आवाज सुनाई दी और विशाल चट्टान दूसरी चट्टानों पर आकर अटक गई, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।
सूत्रों के अनुसार, पहाड़ी पर बारूद से ब्लास्टिंग की गई थी, जिससे चट्टानों की संरचना कमजोर हो गई। इसके अलावा अवैज्ञानिक निर्माण, पत्थरों की कटाई और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को भी इस हादसे का कारण माना जा रहा है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी भूपेंद्र उइके ने बताया कि हादसे में गिरे पेड़ों और चट्टानों को हटाकर रास्ता साफ कर दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह प्राकृतिक आपदा प्रतीत हो रही है, लेकिन वन विभाग घटना के कारणों की जांच करेगा और भविष्य में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस घटना ने मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रस्ट समिति का चुनाव चल रहा है, इसलिए अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, जानकारों का कहना है कि यदि पहाड़ी पर अंधाधुंध निर्माण और बारूद से खुदाई पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
इस घटना को प्रशासन, ट्रस्ट और पर्यावरण विभाग के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है कि आस्था और विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और इस ऐतिहासिक धार्मिक स्थल के संरक्षण के लिए ठोस एवं समन्वित प्रयास समय की मांग बन गई है।
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