भिलाई:25 मार्च 2025- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में गुटबाजी इस कदर हावी हो गई है कि मामला अब थाने और सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहा है। पार्टी में बढ़ते आंतरिक विवाद के बीच जिला भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने पूर्व पार्षद और जिला मंत्री जेपी यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त बताते हुए उन्हें 6 वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जेपी यादव ने देवांगन को “एक्सीडेंटल अध्यक्ष” करार दिया और खुद को अब भी भाजपा का अधिकृत सदस्य बताया।
विवाद की जड़: सांसद बनाम विधायक गुटबाजी:
भाजपा के इस विवाद के पीछे विधायक रिकेस सेन और सांसद विजय बघेल के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन विधायक रिकेस सेन के करीबी माने जाते हैं, जबकि जेपी यादव और जोन अध्यक्ष जलंधर सिंह सांसद विजय बघेल के समर्थक हैं। आरोप है कि विधायक के इशारे पर जिला अध्यक्ष ने जेपी यादव और जलंधर सिंह को पार्टी से बाहर करने की सिफारिश की, जबकि सांसद इस निर्णय के खिलाफ हैं।
आरोपों की बौछार, कानूनी कार्रवाई की मांग:
भिलाई भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर जेपी यादव पर भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक रिकेस सेन के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने का आरोप लगाया। इसी आधार पर पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। देवांगन ने दुर्ग एसपी जितेन्द्र शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर जेपी यादव के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग भी की।
जिला अध्यक्ष का दावा:
- जेपी यादव भाजपा से निष्कासित हो चुके हैं, फिर भी खुद को राष्ट्रीय प्रवक्ता बताकर जनता को गुमराह कर रहे हैं।
- वे पार्टी के नाम का दुरुपयोग कर अवैध वसूली जैसी गतिविधियों में संलिप्त हैं।
- जलंधर सिंह और जेपी यादव का अब भाजपा से कोई संबंध नहीं है।
जेपी यादव का पलटवार:
जेपी यादव ने जिला अध्यक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वे भाजपा के पूर्णकालिक सदस्य हैं और उनके पास इसके सारे दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और सांसद ने खुद उन्हें पार्टी में सक्रिय रूप से कार्य करने के लिए अधिकृत किया है। यादव ने जिला अध्यक्ष को “एक्सीडेंटल” करार देते हुए सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर कई पोस्ट भी किए हैं। जेपी यादव का सवाल है कि यदि वे निष्कासित हैं, तो फिर उन्हें मुख्यमंत्री और सांसद के समक्ष भाजपा में क्यों शामिल करवाया गया? क्या उस समय दिया गया भाजपा का गमछा नकली था, या फिर अब जिला अध्यक्ष का दावा गलत है?
पार्टी की छवि पर असर, आगामी चुनावों पर प्रभाव:
भाजपा में बढ़ती गुटबाजी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। लोकसभा चुनाव के दौरान भीतरघात की शिकायतों के बाद यह विवाद और गहरा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह कलह नहीं सुलझी, तो आगामी चुनावों में पार्टी को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है। क्या विधायक और सांसद के बीच सुलह होगी, या फिर यह कलह और ज्यादा बढ़ेगी? भाजपा की आगामी रणनीति इस विवाद को समाप्त करने में कितनी सफल होगी, यह समय ही बताएगा।
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