कोरबा/ छत्तीसगढ़
हाइलाइट:
- मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ड्रेसिंग रूम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
- मरीज के दोस्त द्वारा खुद ड्रेसिंग करने का मामला आया सामने
- अस्पताल प्रबंधन ने शुरू की जांच
- स्वास्थ्य व्यवस्था और कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
जिला मेडिकल College अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में स्टाफ के समय पर मौजूद नहीं रहने के आरोप के बीच एक मरीज के दोस्त को ही ड्रेसिंग करनी पड़ी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। वायरल वीडियो को लेकर लोग सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल में समय पर स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होंगे तो मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
ऑपरेशन के बाद ड्रेसिंग कराने पहुंचा था मरीज
जानकारी के अनुसार रामपुर निवासी हुकुम कुमार का कुछ दिन पहले पथरी का ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुआ था। ऑपरेशन के बाद टांकों में दर्द और परेशानी बढ़ने पर वह अपने दोस्त चंदन कुमार के साथ अस्पताल पहुंचा था। आरोप है कि ड्रेसिंग रूम में काफी देर तक कोई स्टाफ नहीं मिला, जिसके बाद चंदन कुमार ने खुद ही मरीज की ड्रेसिंग कर दी। इसी दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों में अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
वायरल वीडियो के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय
मामले की जानकारी मिलते ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सह अधीक्षक रविकांत जाटवर मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कराई। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की पड़ताल की गई है। उनके अनुसार, ड्रेसिंग रूम में कर्मचारी मौजूद था और उसने मरीज के दोस्त को ऐसा करने से मना भी किया था, लेकिन इसके बावजूद उसने खुद ड्रेसिंग कर दी। हालांकि इस बयान के बाद भी लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों हुई, जहां मरीज के परिजन को चिकित्सा प्रक्रिया अपने हाथ में लेनी पड़ी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और कर्मचारियों की जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर उपचार और आवश्यक सुविधाएं मिलना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि ड्रेसिंग जैसी सामान्य प्रक्रिया के दौरान भी मरीजों को परेशानी झेलनी पड़े तो यह स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर कमी को दर्शाता है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन जांच की बात कह रहा है, लेकिन वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मरीजों की सुरक्षा और भरोसे का मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में संक्रमण से बचाव और मरीजों की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित स्टाफ द्वारा ही ड्रेसिंग जैसी प्रक्रियाएं की जानी चाहिए। ऐसे मामलों से मरीजों का भरोसा कमजोर होता है और स्वास्थ्य संस्थानों की छवि पर भी असर पड़ता है। अब सभी की नजर अस्पताल प्रशासन की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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