रायपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट्स
- रायपुर में विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए शुरू होगी नई डे-केयर पहल
- गतिविधि आधारित शिक्षा, विशेष शिक्षकों और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की रहेगी भूमिका
- सामान्य और विशेष बच्चों को साथ सीखने का मिलेगा अवसर
- विशेष बच्चों की बढ़ती जरूरतों के बीच नई पहल
- संपर्क कर सकेंगे 9575755513 पर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विशेष जरूरतों और बौद्धिक चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की शुरुआत की जा रही है। “लेखा प्रेप एकेडमी” के नाम से एक विशेष डे-केयर स्कूल खोला जा रहा है, जहां ऐसे बच्चों के लिए सुरक्षित, खुशहाल और सीखने के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल को लेकर संस्थान की संस्थापक एवं प्राचार्या श्रीमति श्रीलेखा चौधरी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर इस प्रयास के लिए आशीर्वाद और सहयोग का आग्रह किया है। उनका कहना है कि समाज में ऐसे बच्चों के लिए बेहतर अवसर और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना समय की बड़ी आवश्यकता बन गई है।
बदलती जीवनशैली और चुनौतियों से बढ़ रही समस्याएं
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, पानी की गुणवत्ता, अत्यधिक तकनीकी उपयोग और मोबाइल फोन पर निर्भरता जैसी कई वजहों से बच्चों के मानसिक और व्यवहारिक विकास पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा देर से विवाह और व्यस्त जीवनशैली के कारण माता-पिता का बच्चों के साथ सीमित समय भी एक कारण माना जा रहा है। ऐसे में कई बच्चों में सीखने की गति, व्यवहारिक समझ और सामाजिक तालमेल से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह डे-केयर सेंटर शुरू किया जा रहा है, ताकि बच्चों को समय रहते सही मार्गदर्शन और सहयोग मिल सके।
गतिविधि आधारित शिक्षा और विशेषज्ञों की देखरेख
प्रस्तावित डे-केयर स्कूल में बच्चों के लिए पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ गतिविधि आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां बच्चों को खेल-कूद, कला, संगीत, रचनात्मक गतिविधियों और व्यवहारिक अभ्यास के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। संस्थान में विशेष शिक्षिका और व्यवहार चिकित्सक महिमा साहू बच्चों के साथ काम करेंगी, जबकि देहरादून की काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट श्रीमति आयुषी ढाका आर्यन भी इस पहल से जुड़कर बच्चों और अभिभावकों को मार्गदर्शन देंगी। विशेषज्ञों की टीम का उद्देश्य यह रहेगा कि बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
समावेशी शिक्षा का अनूठा मॉडल
इस डे-केयर की सबसे खास बात यह होगी कि यहां केवल विशेष जरूरतों वाले बच्चों को ही नहीं, बल्कि सामान्य बच्चों को भी प्रवेश दिया जाएगा। संस्थान का मानना है कि जब सामान्य और विशेष बच्चे एक साथ सीखते हैं तो उनमें परस्पर समझ, सहानुभूति और सहयोग की भावना विकसित होती है। यह मॉडल समावेशी शिक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे विशेष बच्चों को समाज में बेहतर ढंग से घुलने-मिलने का अवसर मिलेगा और सामान्य बच्चों में भी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।
समाज और सरकार के सहयोग की उम्मीद
संस्थान की संस्थापक और प्राचार्य श्रीमति श्रीलेखा चौधरी का कहना है कि यह पहल केवल एक स्कूल खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में विशेष बच्चों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाना भी है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार, सामाजिक संगठनों और समाज के लोगों का सहयोग मिलने से यह प्रयास और प्रभावी बन सकेगा। मुख्यमंत्री से सहयोग और आशीर्वाद का अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि यदि शासन का मार्गदर्शन और समर्थन मिला तो इस तरह के केंद्र भविष्य में अन्य शहरों में भी स्थापित किए जा सकते हैं, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को लाभ मिल सके।
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