बिलासपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट्स
- तालापारा (अज्ञेय नगर) स्थित प्रोजेक्ट में नियम उल्लंघन के आरोप
- एरिया स्टेटमेंट में 60 फ्लैट, नक्शे में 90 फ्लैट और 6 मंजिल का उल्लेख
- फर्जी इंजीनियर के नाम से नक्शा पास कराने का आरोप
- बिल्डर और अधिकारियों पर एफआईआर की मांग
नियमों के उल्लंघन का आरोप, अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
बिलासपुर नगर निगम और नगर ग्राम निवेश (T&CP) विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर के तालापारा (अज्ञेय नगर) क्षेत्र में स्थित ‘मेसर्स अनंत रियाल्टी’ प्रोजेक्ट में नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट में निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और स्वीकृत नक्शे के बीच गंभीर अंतर पाया गया है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के 177 अवैध संस्थानों का मुद्दा भी चर्चा में है। इस पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जांच कमेटी गठित करने की घोषणा की है, जिससे इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत नक्शे में बड़ा अंतर
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एरिया स्टेटमेंट और स्वीकृत भवन नक्शे के बीच अंतर बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार बिल्डर नमन गोयल ने अनुमोदित अभिन्यास के एरिया स्टेटमेंट में चार मंजिल पर 60 फ्लैट निर्माण का उल्लेख किया था। वहीं उसी अभिन्यास के नक्शे में फ्लैट की संख्या बढ़ाकर 90 और मंजिलों की संख्या छह कर दी गई। आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित विभागों ने नक्शा स्वीकृत कर दिया। नगर निगम के बिल्डिंग ऑफिसर अनुपम तिवारी ने बताया कि यह नक्शा उनके कार्यभार संभालने से पहले स्वीकृत किया गया था और फिलहाल T&CP के संयुक्त संचालक बीपीएस पटेल तथा उनकी टीम मामले की जांच कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर मौजूद सड़क की चौड़ाई के अनुसार इतनी संख्या में फ्लैट की अनुमति कैसे दी गई, यह जांच का विषय है।
फर्जी इंजीनियर के नाम से नक्शा पास कराने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रोजेक्ट का नक्शा ‘विकास सिंह’ नाम के एक इंजीनियर के माध्यम से तैयार कराया गया, जबकि बिलासपुर में इस नाम का कोई पंजीकृत आर्किटेक्ट या इंजीनियर मौजूद नहीं पाया गया। बताया जा रहा है कि इसी नाम का उपयोग पहले भी कई अवैध निर्माणों के नक्शे पास कराने के लिए किया गया था, जिसके बाद नगर निगम ने संबंधित लाइसेंस को निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद उसी निलंबित पहचान के आधार पर नए प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिलने से विभागीय मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। मामले की जांच कर रहे संयुक्त संचालक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका।
झूठे शपथ पत्र के आधार पर अनुमति का आरोप
नियमों के अनुसार बड़े आवासीय प्रोजेक्ट में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए फ्लैट आरक्षित करना अनिवार्य होता है। आरोप है कि बिल्डर ने शपथ पत्र में उल्लेख किया कि ग्राम तिफरा के खसरा नंबर 407/7 में EWS फ्लैट बनाए जाएंगे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह जानकारी भी संदिग्ध है और इसकी जांच आवश्यक है। यदि यह तथ्य गलत पाया जाता है तो यह नियमों के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आएगा।
बिल्डर और अधिकारियों पर एफआईआर की मांग
मामला सामने आने के बाद बिल्डर नमन गोयल और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रोजेक्ट की विकास अनुज्ञा और भवन अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए ताकि आम नागरिकों को संभावित धोखाधड़ी से बचाया जा सके। इस संबंध में गोपाल नाम के आवेदक ने संचालक नगरीय प्रशासन, संचालक नगर ग्राम निवेश, कलेक्टर बिलासपुर और नगर निगम आयुक्त को लिखित शिकायत भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। साथ ही 25 जून 2025 को जारी विकास अनुज्ञा निरस्त कर निर्माण कार्य रोकने की भी मांग की गई है।
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