दुर्ग/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
- शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का बिना हेलमेट बाइक चलाने का वीडियो हुआ वायरल
- कार्रवाई न होने पर NSUI ने किया विरोध, ट्रैफिक टीआई से हुई बहस
- कोतवाली पुलिस ने NSUI दुर्ग विधानसभा अध्यक्ष वरुण केवलतानी पर दर्ज की FIR
- कांग्रेस नेताओं ने कानून की समानता और रोड सेफ्टी पर उठाए सवाल
बिना हेलमेट मंत्री, कार्रवाई शून्य—विवाद की शुरुआत
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बिना हेलमेट बाइक चलाने का मामला अब केवल यातायात नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक बहस और प्रशासनिक कार्रवाई का केंद्र बन गया है। 23 जनवरी की सुबह मंत्री अपने समर्थकों के साथ शहर भ्रमण पर निकले थे, उसी दौरान यातायात जागरूकता सप्ताह भी चल रहा था। बिना हेलमेट बाइक चलाते हुए मंत्री का वीडियो खुद उनके सोशल मीडिया अकाउंट से साझा हुआ, जिसने देखते ही देखते सवालों की बाढ़ खड़ी कर दी।
मंत्री का बयान और ट्रैफिक पुलिस की चुप्पी
मामला तूल पकड़ने पर मीडिया के सवालों के जवाब में मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि रात 10 बजे से सुबह 8 बजे तक हेलमेट नियमों में शिथिलता रहती है और वे सुबह 7:10 बजे निकले थे। हालांकि, इसके बावजूद ट्रैफिक पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही चुप्पी NSUI के विरोध का कारण बनी। संगठन का तर्क था कि जब आम नागरिकों और छात्रों के चालान काटे जा रहे हैं, तो मंत्री के मामले में नियम अलग क्यों?
विरोध प्रदर्शन, कथित दुर्व्यवहार और FIR
7 फरवरी को NSUI दुर्ग विधानसभा अध्यक्ष वरुण केवलतानी के नेतृत्व में कार्यकर्ता दुर्ग ट्रैफिक थाना पहुंचे। उन्होंने ट्रैफिक टीआई युवराज साहू से मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और प्रतीकात्मक विरोध स्वरूप चूड़ी, बिंदी और साड़ी भेंट करने का प्रयास किया। इस दौरान कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगा, जिसके बाद टीआई की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने वरुण केवलतानी सहित अन्य पर धारा 126(2)-BNS, 132-BNS, 221-BNS और 3(5)-BNS के तहत मामला दर्ज कर लिया।
कांग्रेस का सवाल—कानून सबके लिए बराबर या नहीं?
दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने भी इस पूरे प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रोड सेफ्टी महीने के दौरान छात्र-छात्राओं के चालान काटे जा रहे हैं, जबकि मंत्री और उनके समर्थक बिना हेलमेट निरीक्षण करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि नियमों की सीख देने से पहले खुद उदाहरण पेश करना चाहिए। यह मामला अब कानून की समानता, जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही और यातायात नियमों के निष्पक्ष पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।


