रायपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
• बस्तर पंडुम 2026 के विजेताओं को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया सम्मानित
• 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों की भागीदारी, 12 जनजातीय विधाओं का भव्य प्रदर्शन
• मार्च 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन और बस्तर को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य
बस्तर की संस्कृति को मिला राष्ट्रीय मंच
केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर भारत की सांस्कृतिक आत्मा का आभूषण है और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने यहां की गौरवशाली परंपराओं को नए प्राण दिए हैं। जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में उन्होंने बताया कि सात जिलों की 32 जनपद पंचायतों और 1885 ग्राम पंचायतों से आए 53 हजार से अधिक लोक कलाकारों ने 12 विधाओं में अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त कलाकारों को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आमंत्रित किया जाएगा, जहां उन्हें कला प्रदर्शन और सहभोज का अवसर मिलेगा।
विकास, सुरक्षा और पुनर्वास की समानांतर पहल
श्री शाह ने कहा कि धरती आबा योजना और पीएम जनमन योजना के जरिए आदिवासी संस्कृति और विरासत को संरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि माओवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी और मार्च 2026 तक इसे निर्णायक रूप से समाप्त किया जाएगा। नियद नेल्ला नार योजना के तहत सड़क, बिजली, मोबाइल टावर, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिससे 40 गांवों में अब गोलियों की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं। नक्सल पुनर्वास नीति को मानवीय बताते हुए उन्होंने इसे सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने की प्रभावी पहल कहा।
नए बस्तर की तस्वीर: संस्कृति, पर्यटन और संभावनाएं
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान का उत्सव है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 54 हजार से अधिक कलाकारों की भागीदारी ने बस्तर की संस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दी है। दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में 2.75 लाख एकड़ सिंचाई के लिए 220 मेगावॉट बिजली उत्पादन, औद्योगिक क्षेत्र और पर्यटन परियोजनाएं बस्तर को विकास की नई दिशा दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर की चर्चा नक्सलवाद नहीं, बल्कि संस्कृति, पर्यटन और संभावनाओं के लिए हो रही है।
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