रायपुर /छत्तीसगढ़
- हाइलाइट :
- छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद पर उच्चस्तरीय समीक्षा
- सुरक्षा-विकास की संयुक्त रणनीति के सकारात्मक नतीजे
- बस्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर और अवसरों पर जोर
- राज्यों-केन्द्र के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता
वामपंथी उग्रवाद पर व्यापक सुरक्षा समीक्षा
रायपुर में रविवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद पर उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव, आईबी निदेशक, गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) सहित छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के गृह सचिव व पुलिस महानिदेशक तथा CRPF, NIA, BSF और ITBP के महानिदेशक मौजूद रहे। गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के कारण ठोस परिणाम सामने आए हैं।
डबल इंजन सरकार के प्रयास और लक्ष्य
अमित शाह ने विश्वास जताया कि 31 मार्च 2026 से पहले देश पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार माओवाद की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है।” उनके अनुसार, छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ था, लेकिन अब यह विकास का पर्याय बन रहा है, जहां युवा खेल, फॉरेंसिक और तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी सहेज रहे हैं।
बस्तर में विकास कार्यों पर संतोष, समन्वय पर जोर
गृह मंत्री ने बस्तर सहित नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि माओवादी विरोधी लड़ाई बिखरी हुई नहीं होनी चाहिए और राज्यों व केंद्रीय एजेंसियों के बीच सुचारू समन्वय अनिवार्य है, ताकि बचे हुए माओवादी किसी अन्य राज्य में पलायन न कर सकें। साथ ही, उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर बल दिया कि नक्सल-प्रभावित इलाकों के नागरिकों को विकास के समान अवसर मिलें और सुरक्षा व विकास—दोनों मोर्चों पर प्रगति निरंतर बनी रहे।
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