रायपुर/छत्तीसगढ़
हाइलाइट बॉक्स:
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में धान खराब होने की घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए भाजपा सरकार पर सवाल खड़े किए हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए ठोस व्यवस्था की मांग की है।
किसानों की मेहनत और व्यवस्था की चूक
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में धान खराब होने के मामलों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि किसानों की सालभर की मेहनत से उपजाया गया धान अगर सड़ रहा है, तो यह केवल प्राकृतिक कारण नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर चूक है। कवर्धा, महासमुंद, जशपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे जिलों से करोड़ों रुपये के धान के नुकसान की खबरें सामने आई हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इसे चूहों, दीमक या बारिश का नतीजा बता रही है, जबकि असल कारण समय पर उठाव और भंडारण की व्यवस्था का अभाव है, जिसकी कीमत किसान चुका रहे हैं।
प्रतीकात्मक विरोध और जवाबदेही की मांग
इसी मुद्दे को लेकर विकास उपाध्याय राज्य के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल को ‘चूहा पिंजरा जाली’ भेंट करने पहुंचे थे। उनका कहना था कि यदि सरकार के अनुसार धान चूहों और दीमक से खराब हुआ है, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस और व्यावहारिक व्यवस्था होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपने और प्रतीकात्मक विरोध का प्रयास किया, लेकिन उन्हें आजाद चौक पर पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद कांग्रेस ने अपनी बात पुलिस के माध्यम से सरकार तक पहुंचाने की बात कही। कांग्रेस का कहना है कि जब नुकसान सामने आ चुका था, तब जिम्मेदार अधिकारियों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
नुकसान के आंकड़े और आगे की राह
कांग्रेस के अनुसार अब तक राज्य में लगभग 26 करोड़ रुपये का धान खराब हो चुका है। अकेले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में करीब 20 हजार क्विंटल धान सड़ने से लगभग 6 करोड़ रुपये का नुकसान बताया जा रहा है, जबकि कवर्धा, जशपुर और महासमुंद जिलों में भी धान खराब होने या गायब होने के मामले सामने आए हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि इन मामलों में जिम्मेदारी तय की जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और भंडारण व उठाव की व्यवस्था को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसानों की मेहनत यूं ही बर्बाद न हो।


