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Sunday, March 29, 2026

जब व्यवस्था भरोसे की भाषा बोलने लगी: छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में डिजिटल बदलाव…

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छत्तीसगढ़ की आबकारी व्यवस्था अब सिर्फ नियमों से नहीं, बल्कि भरोसे से चल रही है। ई-सर्विस आधारित सिस्टम ने पारदर्शिता बढ़ाई, अव्यवस्था कम की और आम नागरिक व कारोबारियों को यह एहसास दिलाया कि शासन अब उनकी मेहनत और समय की कद्र करता है।

जहाँ व्यवस्था नागरिक की पीड़ा समझने लगी

पारदर्शिता केवल एक प्रशासनिक शब्द नहीं, बल्कि नागरिक के भरोसे की बुनियाद होती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने जब ई-सर्विस को अपनाया, तो इसका असर काग़ज़ों से निकलकर ज़मीन पर दिखने लगा। पहले जहाँ लाइसेंस, भुगतान और परमिट की प्रक्रियाएँ उलझन और असमंजस पैदा करती थीं, वहीं अब बॉटलिंग से लेकर डिलीवरी तक हर चरण डिजिटल निगरानी में है। ई-चालान, सिंगल विंडो लॉग-इन और रियल-टाइम कैश कलेक्शन जैसी व्यवस्थाओं ने न केवल समय बचाया, बल्कि आम लोगों को यह भरोसा भी दिया कि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित हाथों में है।

निगरानी नहीं, विश्वास की व्यवस्था

आबकारी विभाग द्वारा लागू ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम, आधार-इनेबल्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस, सेंट्रल वीडियो मॉनिटरिंग और टोल-फ्री शिकायत सुविधा ने व्यवस्था को कठोर नहीं, बल्कि संवेदनशील बनाया है। QR कोड, मोबाइल स्कैनिंग और GPS आधारित ट्रक ट्रैकिंग से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है, ताकि कोई भी अनियमितता आम नागरिक को नुकसान न पहुँचा सके। एक लाइसेंसधारी व्यापारी का कहना है, “पहले हर काम में डर और भ्रम रहता था, अब सिस्टम साफ है, प्रक्रिया दिखती है और शिकायत का जवाब भी मिलता है।” यही बदलाव व्यवस्था को मानवीय बनाता है।

राजस्व से आगे, सुशासन की अनुभूति

इस तकनीक-आधारित और पारदर्शी प्रणाली का परिणाम केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन की विश्वसनीयता में भी झलकता है। चालू वित्तीय वर्ष में 12 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, दिसंबर तक 10.50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7,851 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित होना इसी भरोसे का संकेत है। आधुनिक वीडियो कंट्रोल रूम, डिजिटल डैशबोर्ड और लाइव डेटा संग्रहण के माध्यम से निर्णय अब त्वरित और तथ्य आधारित हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग आज केवल राजस्व जुटाने वाली संस्था नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार के सुशासन के संकल्प को ज़मीन पर उतारने वाला माध्यम बन चुका है—जहाँ तकनीक के साथ-साथ इंसान को भी केंद्र में रखा गया है।

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