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Wednesday, February 11, 2026

मनरेगा में बदलाव मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला, दीपक बैज…

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जगदलपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मनरेगा कानून में किया गया बदलाव मजदूर विरोधी है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और गरीबों के अधिकारों पर कुठाराघात बताया। कांग्रेस का आरोप है कि नए फ्रेमवर्क से रोजगार की कानूनी गारंटी खत्म कर दी गई है।

मनरेगा की आत्मा पर प्रहार

जगदलपुर में प्रेस से बात करते हुए छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सुधार के नाम पर लोकसभा में पारित नया बिल दरअसल दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश है। अब तक मनरेगा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत काम के अधिकार से जुड़ी कानूनी गारंटी थी, लेकिन नए ढांचे में इसे शर्तों से बंधी, केंद्र-नियंत्रित योजना बना दिया गया है। बैज के अनुसार यह बदलाव महात्मा गांधी की सोच और ग्राम स्वराज की भावना के खिलाफ है।

12 करोड़ मजदूरों का अधिकार छीना गया

दीपक बैज ने कहा कि सरकार ने न केवल महात्मा गांधी का नाम हटाया, बल्कि लगभग 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकार भी समाप्त कर दिए। दो दशकों से यह योजना ग्रामीण भारत के लिए लाइफलाइन रही है और कोविड-19 जैसी आपदा के समय करोड़ों परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का सहारा बनी। पहले मजदूर कानूनी अधिकार के रूप में काम मांग सकते थे, लेकिन अब इसे सरकार की मर्जी पर चलने वाली योजना में बदल दिया गया है। नए सिस्टम में हर साल तय अवधि के लिए रोजगार बंद करने की छूट होगी, जिससे गरीबों के सामने भूख और बेरोजगारी का खतरा बढ़ेगा।

राज्यों पर बढ़ेगा बोझ, योजना पर संकट

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि मनरेगा केंद्रीय कानून था, जिसमें अधिकांश राशि केंद्र सरकार देती थी। अब केंद्र-राज्य हिस्सेदारी 60:40 कर दी गई है और पहले राज्य को अपनी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी जमा करनी होगी, तभी केंद्र फंड जारी करेगा। इससे राज्यों पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बैज का दावा है कि बजट का दबाव बढ़ते ही राज्य सरकारें इस योजना को लागू करने से पीछे हटेंगी और मनरेगा धीरे-धीरे बंद हो जाएगी।

100 से 125 दिन की बात केवल भ्रम

कांग्रेस ने 100 से 125 दिन रोजगार बढ़ाने के दावे को भी छलावा बताया। बैज ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भाजपा सरकार किसी भी साल औसतन 100 दिन का रोजगार नहीं दे पाई। राष्ट्रीय औसत केवल 38 दिन का रहा है। छत्तीसगढ़ में भी भाजपा सरकार आने के बाद 70 प्रतिशत गांवों में अघोषित रूप से काम बंद है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम के नाम पर भी भ्रम फैला रही है, जबकि V.B.G.RAM.G. योजना का भगवान राम से कोई संबंध नहीं है।

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