रायपुर /छत्तीसगढ़
2011 में सेवा निवृत्त हुए बिजली विभाग के कर्मचारियों को बिजली बिल में 25 प्रतिशत छूट दी जा रही थी, जिसे अब संशोधित कर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, विभाग ने 2015 से 2025 तक अतिरिक्त दी गई 25 प्रतिशत छूट की राशि की वसूली करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद सेवा निवृत्त कर्मियों में गहरा रोष व्याप्त है, क्योंकि वसूली 10 वर्षों की अवधि के लिए की जाएगी, जो आर्थिक रूप से संघ के अनुसार “अनुचित और कर्मचारी हितों के विपरीत” है।
सेवा निवृत्त कर्मचारी संघ की प्रतिक्रिया
सेवा निवृत्त कर्मचारी संघ ने इस पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। संघ के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा, “छूट बढ़ाने का स्वागत है, लेकिन पुरानी अवधि की वसूली का निर्णय बिना उचित परीक्षण और सहमति के लिया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।” संघ ने यह भी आरोप लगाया कि 2015 से 2025 तक लागू छूट व्यवस्था में कई विसंगतियां हो सकती हैं, जिन्हें कर्मचारी संघ अपने स्तर पर सत्यापित करना चाहता है। इस संदर्भ में संघ ने विभागीय अधिकारियों से रिकॉर्ड जांच, छूट गणना की समीक्षा और वसूली आदेश पर पुनर्विचार की मांग की है।
कर्मचारी हित, प्रभाव और जांच की अपील
संघ का कहना है कि 2011 में सेवा निवृत्त कर्मचारियों ने जो लाभ पाया, वह तत्कालीन नीति के तहत था और वर्षों बाद उसकी वसूली से वरिष्ठ कर्मियों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। संघ ने प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग से आग्रह किया है कि इस प्रकरण की स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाए और वसूली प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए, जब तक रिपोर्ट सार्वजनिक न हो जाए। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि छूट वृद्धि कर्मचारी सम्मान की दिशा में सकारात्मक कदम है, परंतु “न्याय संगत समाधान” के बिना वसूली संघ के विश्वास और मनोबल को प्रभावित करेगी। संघ ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी वसूली को स्थगित रखना कर्मचारी हित में होगा।
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