नई दिल्ली /भारत
हाइलाइट
शुक्रवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में तीन बड़े फैसलों पर मुहर लगी। देश की पहली डिजिटल जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपए स्वीकृत, कोयला क्षेत्र में नई पारदर्शी व्यवस्था ‘कोल सेतु’ को मंजूरी, और किसानों के लिए खोपरा (कॉपरा) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की घोषणा। इन निर्णयों से जनगणना प्रक्रिया, ऊर्जा सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।
2027 की पहली डिजिटल जनगणना — डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता पर फोकस
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। यह जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी—पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का। डेटा संग्रह के लिए एक बहुभाषी मोबाइल ऐप का इस्तेमाल होगा, जिसे विशेष रूप से डेटा सुरक्षा और तेज प्रोसेसिंग को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। मंत्रालय का दावा है कि डिजिटल व्यवस्था से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि रिपोर्टिंग में होने वाली देरी भी समाप्त होगी |
कोल सेतु व्यवस्था से ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा सुधार, 60 हजार करोड़ की बचत
कैबिनेट ने कोयले की नीलामी के लिए नई डिजिटल प्रणाली ‘कोल सेतु’ को मंजूरी दी है। वैष्णव ने बताया कि भारत अब कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और आयातित कोयले पर निर्भरता लगातार कम हो रही है। वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने 1 बिलियन टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे लगभग 60 हजार करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। रेल और कोल मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से घरेलू पावर प्लांट्स में रिकॉर्ड स्तर का कोल स्टॉक बना है। नई व्यवस्था से पारदर्शिता, आपूर्ति स्थिरता और उत्पादन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “कोल सेतु से नीलामी प्रक्रिया में खुलापन बढ़ेगा और ग्राउंड लेवल मैनेजमेंट मजबूत होगा।
किसानों को राहत — खोपरा (कॉपरा) MSP में बढ़ोतरी
किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले के तहत केंद्र सरकार ने 2026 के लिए पिसाई वाले खोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 12,027 रुपए प्रति क्विंटल और गेंदे (गोल) खोपरा का समर्थन मूल्य 12,500 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। MSP खरीद के लिए NAFED और NCCF को नोडल एजेंसियां बनाया गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि MSP बढ़ने से नारियल किसानों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी और बाजार मूल्य स्थिर रहने में मदद मिलेगी। सरकार का दावा है कि यह निर्णय कृषि क्षेत्र की आय बढ़ाने और किसानों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
ख़बरें और भी…



hFvKEcVcLiqYQzYtvkWoOtRG