रायपुर / छत्तीसगढ़
हाइलाइट
EOW ने कोल घोटाले के अहम खिलाड़ी और 5 साल से फरार चल रहे चार्टर्ड अकाउंटेंट राकेश कुमार जैन को रायपुर कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 12 से अधिक फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों की अवैध कोल वसूली को हवाला नेटवर्क से मुख्य आरोपियों तक पहुंचाया। कोर्ट ने आरोपी को 19 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
फर्जी कंपनियों का जाल और 50 करोड़ की वसूली हवाला के जरिए पहुंचाने का आरोप
छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाले में आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) राकेश कुमार ज Jain को EOW ने उस समय गिरफ्तार किया जब वह शुक्रवार को रायपुर कोर्ट में पेश होने पहुँचा। जांच में खुलासा हुआ है कि जैन ने अपने, साले और कर्मचारियों के नाम पर 12 से ज्यादा कंपनियां बनाईं, जिनका उपयोग कोल लेवी की करोड़ों की राशि को हवाला नेटवर्क के जरिए आरोपियों तक पहुंचाने में किया गया। EOW सूत्रों के अनुसार जैन ने करीब 50 करोड़ रुपए तक के फर्जी खर्च दिखाकर उसे कैश में बदला और यह रकम कोल घोटाले के मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी तक पहुँचाई। कोर्ट ने उसे न्यायाधीश नीरज शर्मा के समक्ष पेश करने के बाद 8 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। एक वरिष्ठ जांच अधिकारी ने बताया कि “यह नेटवर्क बेहद संगठित था, जिसमें फर्जी बिलिंग, एंट्री ऑपरेटर और शेल कंपनियों का व्यापक इस्तेमाल किया गया।
हवाला नेटवर्क के समानांतर शराब घोटाले में भी भूमिका, शेयर बाज़ार में निवेश के नाम पर 50 करोड़ की ठगी
जांच में यह भी सामने आया है कि राकेश जैन ने न केवल कोल वसूली बल्कि शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर के लिए भी अवैध रकम को सफेद धन में बदलने का काम किया। आरोप है कि उसने फर्जी एंट्री, कागजात और फर्जी निवेश स्कीमों के जरिए कई लोगों से शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का लालच देकर 50 करोड़ से अधिक की ठगी की। जैन के खिलाफ EOW सहित विभिन्न थानों में 16 से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि “निवेश का लालच देकर भोले निवेशकों को फंसाना उसकी पुरानी कार्यशैली थी, जिसमें वह नियमित रूप से नए पीड़ित ढूंढता था।
कोल स्कैम की बड़ी तस्वीर: 570 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली, 36 लोगों पर FIR
ED और EOW की संयुक्त जांच में सामने आया कि कोल ट्रांसपोर्ट, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने और विभागीय अनियमितताओं के जरिए लगभग 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई। इस मामले में दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों, IAS अधिकारियों और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी सहित 36 के खिलाफ FIR दर्ज है। आरोपों के अनुसार प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली की रकम हवाला, फर्जी बिलिंग और कंपनियों के जरिए अलग-अलग चैनलों से वापस सिस्टम में डाली जाती थी। ED की रिपोर्ट में सूर्यकांत तिवारी को इस वसूली नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया गया है। खनिज विभाग के अधिकारियों पर भी ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने और मैनुअल हस्तक्षेप के जरिए व्यापारियों से वसूली कराने के आरोप लगाए गए हैं।
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