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Friday, April 10, 2026

रायपुर : रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित भविष्य गढ़ने में सहायक होगा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय…

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राजधानी रायपुर में आज एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और प्रदेश के छह प्रमुख विश्वविद्यालयों के बीच “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह एक वर्षीय “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन” देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है, जिसे युवाओं को संवेदनशील, जागरूक और पेशेवर रूप से सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य को दिशा देगा। यह पाठ्यक्रम युवाओं में बाल अधिकार संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा और उन्हें इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा करते हुए 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू किए हैं, जिससे छत्तीसगढ़ सुशासन के नए मानक स्थापित कर रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बच्चों से जुड़ी संवेदनशील समस्याओं—जैसे भिक्षावृत्ति, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास और विभिन्न संरक्षण सेवाओं—में प्रशिक्षित युवा कार्यबल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह पाठ्यक्रम उस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने इसे राज्य की शैक्षणिक उपलब्धियों में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

यह कार्यक्रम पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई-दुर्ग में प्रारंभ किया जाएगा। पाठ्यक्रम में युवाओं को विधिक प्रावधान, विभागीय योजनाएं, बाल संरक्षण इकाइयों की संरचना, प्रायोगिक कार्यप्रणाली और संस्थागत प्रक्रियाओं की गहरी समझ प्रदान की जाएगी।

कार्यक्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, विभागीय अधिकारी और अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षक पाठ्यक्रम प्रदेश में बाल अधिकार संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाने में सक्षम होगा और छत्तीसगढ़ को इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

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