स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल न्यूज़ डेस्क
हाइलाइट बॉक्स
कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 3 नवंबर को मनाया जाएगा सोम प्रदोष व्रत इस दिन बन रहे हैं तीन शुभ योग — रवि योग , शिववास योग और हर्षण योग प्रदोष काल में शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं होंगी पूर्ण गन्ने के रस से अभिषेक करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है
भगवान शिव की आराधना का पावन पर्व सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है । यह व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है । इस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है । धार्मिक मान्यता के अनुसार , जो भक्त सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग की विधिवत पूजा करता है , उस पर स्वयं महादेव प्रसन्न होकर उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं । जब यह व्रत सोमवार को पड़ता है , तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है ।
तिथि , समय और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार , कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 3 नवंबर की सुबह 507 बजे से होगा और समापन 4 नवंबर की सुबह 205 बजे पर होगा । व्रत और पूजा का सबसे शुभ समय प्रदोष काल रहेगा , जो शाम 534 बजे से रात 811 बजे तक रहेगा । इसी अवधि में भगवान शिव की आराधना , अभिषेक और मंत्रजाप करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है ।
बन रहे हैं तीन शुभ योग रवि योग , शिववास योग और हर्षण योग
इस बार के सोम प्रदोष व्रत पर तीन शुभ योगों का दुर्लभ संयोग बन रहा है , जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है । रवि योग दोपहर 305 बजे से अगले दिन तक रहेगा । इस योग में शिव पूजन करने से दीर्घायु और आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है । शिववास योग देर रात 205 बजे तक रहेगा , जब महादेव नंदी पर विराजमान होंगे । इस योग में शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र चढ़ाने से सौभाग्य और शांति की प्राप्ति होती है । हर्षण योग प्रदोष काल तक सक्रिय रहेगा । इस योग में शिव-पार्वती की आराधना से मनोकामना सिद्धि और जीवन में खुशहाली आती है ।
पूजा विधि और व्रत की प्रक्रिया
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें , स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें । दिनभर फलाहार या निर्जला उपवास करें । शाम को पुनः स्नान के बाद पूजा स्थल को शुद्ध करें और दीप प्रज्वलित करें । गंगाजल , दूध , दही , शहद , घी और गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें । भगवान शिव को चंदन , धतूरा , बेलपत्र , शमी पत्र और भस्म अर्पित करें । इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करें और श्रद्धा से शिव तांडव स्तोत्र या शिव चालीसा का पाठ करें । पूजा के अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें ।
विशेष उपाय समृद्धि और शांति के लिए करें ये कार्य
गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है । बेलपत्र पर ‘ॐ’ लिखकर चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है । शमी के फूल अर्पित करने से कार्य सिद्धि होती है । चांदी का नाग या त्रिशूल मंदिर में चढ़ाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता बढ़ती है ।
शिव कृपा से दूर होंगे सभी संकट सोम प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं , बल्कि आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का माध्यम भी है । इस पावन अवसर पर जो भी भक्त श्रद्धा से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता है , उसके जीवन से रोग , भय और कष्ट दूर हो जाते हैं और समृद्धि , सौभाग्य और शांति प्राप्त होती है ।
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