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Wednesday, February 11, 2026

दिल्ली फिर घुटन में—जब ‘वायु’ जीवन का आधार नहीं, खतरा बन गई: अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ हवा अब अधिकार नहीं, संघर्ष बन गई…

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हाइलाइट बॉक्स:

  • संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीवन और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है।
  • दिल्ली में सर्दी के साथ आता है “पाँचवां मौसम”—प्रदूषण का मौसम।
  • विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली की वायु गुणवत्ता WHO मानक से 25 गुना अधिक प्रदूषित।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा—स्वच्छ पर्यावरण हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।

मुख्य समाचार:
दिल्ली। जैसे ही ठंड दस्तक देती है, दिल्ली एक नए मौसम में प्रवेश कर जाती है—“प्रदूषण ऋतु”, जहाँ जीवन का आधार बनी वायु ही लोगों की सबसे बड़ी शत्रु बन जाती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को जीवन के अधिकार की गारंटी दी गई है, जिसे न्यायालयों ने केवल अस्तित्व नहीं, बल्कि सम्मान, स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण के साथ जिए गए जीवन के रूप में परिभाषित किया है। इसलिए, स्वच्छ वायु कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है

फिर भी, हर सर्दी में दिल्ली धुंध और जहरीली हवा के जाल में फँस जाती है। IQAir 2024 वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सीमा से लगभग 25 गुना अधिक है। यह न केवल पर्यावरणीय संकट है, बल्कि एक संवैधानिक संकट भी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बार कहा था कि “राजधानी एक गैस चैंबर बन गई है,” जो नागरिकों की असहायता को बयां करता है।

वायु—जो कभी शुद्धिकरण का प्रतीक थी, अब शुद्धिकरण की माँग कर रही है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में “पवन शुद्धि सर्वभूतानाम्” कहा गया है, पर आज वही पवन प्रदूषण से कराह रही है। दिल्ली की भौगोलिक स्थिति—हिमालय और अरावली से घिरी हुई—इसे ठहरी हुई हवा का कटोरा बना देती है, जहाँ वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक धुआँ, निर्माण की धूल और पराली का धुआँ मिलकर लोगों की साँसें रोक देता है।

कानूनी दृष्टि से संकट गहरा
भारतीय न्यायपालिका ने अनुच्छेद 21, 48A और 51A(g) को मिलाकर पर्यावरण संरक्षण को जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है। सुप्रीम कोर्ट ने एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ और सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य मामलों में यह स्पष्ट किया कि “स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार” मौलिक अधिकारों की जड़ में निहित है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि दिल्ली में तत्काल और सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह “पाँचवाँ मौसम” स्थायी आपदा में बदल सकता है। नागरिक अब त्योहार नहीं, बल्कि N95 मास्क, एयर प्यूरीफायर और बंद खिड़कियों के साथ इस मौसम की तैयारी करते हैं। यह केवल प्रदूषण नहीं, बल्कि जीवन और अधिकार के बीच का संघर्ष है।

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