नवा रायपुर में निर्माणाधीन देश का पहला डिजिटल आदिवासी संग्रहालय, जो छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और वीरता का प्रतीक बनेगा।
स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल न्यूज़ डेस्क
हाइलाइट बॉक्स:
- नवा रायपुर के सेक्टर-24 में 50 करोड़ की लागत से बनेगा देश का पहला डिजिटल ट्राइबल म्यूजियम
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर करेंगे लोकार्पण
- वीर नारायण सिंह, बिरसा मुंडा और अन्य आदिवासी नायकों के शौर्य की झलक मिलेगी डिजिटल रूप में
छत्तीसगढ़ के शौर्य और आदिवासी गौरव की जीवंत झांकी बनेगा यह संग्रहालय
रायपुर, 29 अक्टूबर 2025 — छत्तीसगढ़ की धरती पर वीरता और त्याग की कहानियां रची गई हैं। जैसे भगवान बिरसा मुंडा देशभर के आदिवासियों के प्रेरणास्रोत हैं, वैसे ही सोनाखान के वीर नारायण सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंककर छत्तीसगढ़ के पहले शहीद के रूप में इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। अब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इन महान आदिवासी नायकों की स्मृतियों को अमर करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है — नवा रायपुर में बनाया जा रहा है देश का पहला डिजिटल आदिवासी संग्रहालय।
मुख्यमंत्री का निर्णय – आदिवासी अस्मिता को मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह संग्रहालय न केवल वीर नारायण सिंह और अन्य आदिवासी नायकों की गाथा को सहेजेगा, बल्कि भावी पीढ़ी को उनके शौर्य से परिचित भी कराएगा। उन्होंने बताया कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति का वैश्विक केंद्र बनेगा, जहां लोग आदिवासी वीरता की गाथाओं को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से अनुभव कर सकेंगे।
50 करोड़ की लागत से बनेगा देश का पहला डिजिटल संग्रहालय
प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के अनुसार, नवा रायपुर के सेक्टर-24 में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह संग्रहालय अपने आप में अनूठा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर इसका लोकार्पण करेंगे। यह देश का पहला ऐसा डिजिटल संग्रहालय होगा जिसमें पारंपरिक इतिहास और अत्याधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
बिरसा मुंडा जयंती पर आदिवासी गौरव का नया अध्याय
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की थी। उनके नेतृत्व में आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना जैसी ऐतिहासिक योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस पहल के तहत आदिवासी इलाकों में मूलभूत सुविधाओं के साथ केंद्र और राज्य की सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
14 सेक्टरों में जीवंत होंगे छत्तीसगढ़ के विद्रोह
इस डिजिटल संग्रहालय में वीर नारायण सिंह स्मारक के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी विद्रोहों — हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल और सोनाखान विद्रोह — को 14 अलग-अलग सेक्टरों में दर्शाया जाएगा। यहां वीएफएक्स तकनीक, प्रोजेक्शन स्क्रीन, क्यूआर कोड स्कैनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे आगंतुक इतिहास को न केवल देख सकेंगे, बल्कि महसूस भी कर पाएंगे।
डिजिटल वृक्ष बताएगा विद्रोहों की कहानी
संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर सरगुजा कलाकारों की नक्काशीदार कला के साथ 1400 वर्ष पुराने साल, महुआ और साजा वृक्ष की प्रतिकृति स्थापित की जा रही है। इसकी पत्तियों पर डिजिटल माध्यम से सभी 14 विद्रोहों की कहानी उकेरी गई है। यह वृक्ष मोशन फिल्म की तरह विद्रोहों की गाथा को जीवंत कर देगा।
हर आगंतुक के लिए आकर्षक और सुविधाजनक अनुभव
संग्रहालय में सेल्फी पॉइंट, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, और भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह एवं रानी गाइडल्यू की भव्य मूर्तियां स्थापित की जा रही हैं। हर कोना प्रेरणा, संस्कृति और गौरव से ओतप्रोत होगा।
मुख्यमंत्री बोले – यह हमारी पहचान, हमारी प्रेरणा है
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “यह संग्रहालय केवल भवन नहीं, बल्कि यह हमारी अस्मिता, हमारी विरासत और हमारी प्रेरणा का प्रतीक है। आने वाली पीढ़ियां यहां आकर अपने पूर्वजों की शौर्य गाथाओं से गर्व की अनुभूति करेंगी।”


