दिल्ली / स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डिजिटल डेस्क
हाइलाइट :
- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ITO स्थित हाथी घाट पर किया छठ पूजन
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यमुना वासुदेव घाट पर लेंगे भाग
- देशभर में श्रद्धा, उत्साह और एकता के साथ मना महापर्व छठ
- सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
देशभर में छठ पूजा की धूम, दिल्ली से लेकर पटना तक उमड़ा जनसागर
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का जादू इस बार पूरे देश में देखने को मिल रहा है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़ और मुंबई तक घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह से ही महिलाएं सिर पर पूजा की टोकरी और कलश लेकर घाटों की ओर निकल पड़ीं। परंपरागत गीतों, ढोलक की थाप और लोकभक्ति की धुनों ने वातावरण को पूरी तरह भक्ति रस से भर दिया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ITO स्थित हाथी घाट पर सूर्य देव और छठी मैया की पूजा-अर्चना की। उन्होंने पूजा से पहले घाट पर की गई तैयारियों का भी जायजा लिया और कहा कि छठ केवल आस्था का नहीं, बल्कि एकता और संस्कारों का पर्व है, जो देश की सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाता है।
यूपी, बिहार और दिल्ली में उमड़ा छठ का उत्सव
गोरखपुर के गुरु गोरखनाथ घाट, पटना के कंकड़बाग और दीघा घाट, तथा नोएडा के कालिंदी कुंज तट पर हजारों श्रद्धालु परिवारों के साथ पहुंचे। सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए महिलाओं ने व्रत रखकर कठोर तप और संयम का पालन किया। इस दौरान घाटों पर “केरवा जे फरेला घाट पे…” जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज वातावरण में आस्था का संचार करती रही।
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उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी बीजेपी नेता संजय मयूख के आवास पर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि छठ पूजा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो परिवार, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य का संदेश देती है।
पीएम मोदी की उपस्थिति से और बढ़ी आस्था की गरिमा
दिल्ली के यमुना वासुदेव घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छठ पूजा में भाग लेने वाले हैं। उनकी यात्रा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने घाटों पर विशेष इंतजाम किए हैं। एनडीआरएफ और दिल्ली पुलिस के जवान लगातार घाटों की निगरानी में तैनात हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि राजधानी में छठ के लिए 100 से अधिक घाटों पर साफ-सफाई, लाइटिंग, पीने के पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की गई है।
चार दिन चलने वाले पर्व ने एकता का संदेश दिया
नहाय-खाय से लेकर अर्क दान तक चलने वाला यह चार दिवसीय पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का प्रतीक है। इसका समापन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होता है। इस अवसर पर देशभर के घाटों पर दिखाई दी भारतीय संस्कृति की अद्भुत एकता, जहां आस्था ने सीमाओं को लांघ कर सबको एक सूत्र में पिरो दिया।
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