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Wednesday, February 11, 2026

क्यों खामोश है व्यवस्था? 330 से अधिक नर्सरी स्कूल बिना मान्यता, हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव से मांगा जवाब…

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मध्यप्रदेश में प्री-प्राइमरी और नर्सरी शिक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सख़्त रुख अपनाते हुए पूछा है कि आखिर बिना मान्यता के चल रहे 330 से अधिक स्कूलों को अब तक कैसे संचालित होने दिया गया? अदालत ने शिक्षा सचिव के शपथपत्र को असंतोषजनक बताते हुए छह हफ्ते में ठोस और विस्तृत जवाब देने का आदेश दिया है।

मामला क्या है?

जनहित याचिका में खुलासा हुआ कि प्रदेश में बिना किसी मान्यता के 330 से अधिक प्री-प्राइमरी और नर्सरी स्कूल चल रहे हैं। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। याचिकाकर्ता सीवी भगवंत राव की ओर से अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने बताया कि इन बच्चों के पास क्लास-1 में प्रवेश के समय वैध प्रमाणपत्र तक नहीं होगा।

यह भी पढ़े : क्या बदलेगी छत्तीसगढ़ की शराब नीति? तीन दिन तक सरकार ने सुनी उद्योग की बात…

कोर्ट की नाराजगी – कारण बताओ, कार्रवाई तय करो

चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने स्पष्ट कहा कि अगर 2013 का सर्कुलर वापस लेने से बच्चों की पढ़ाई या भविष्य प्रभावित होता है, तो राज्य सरकार जिम्मेदार अधिकारियों एवं संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करे। कोर्ट ने पूछा –

“बिना अनुमति 12 साल तक स्कूल कैसे चल गए? गलियों–मोहल्लों में ऐसे संस्थान क्यों पनपे?”

शिक्षा सचिव का शपथपत्र – लेकिन जवाब अधूरा

शिक्षा सचिव ने अदालत को बताया कि 23 सितंबर 2025 को 2013 का सर्कुलर रद्द किया गया, क्योंकि वह RTE एक्ट 2009 के अनुरूप नहीं था। RTE केवल 6 से 14 वर्ष (कक्षा 1 से 8) तक लागू होता है, जबकि सर्कुलर प्री-नर्सरी स्तर पर लागू किया गया था।
साथ ही यह भी स्वीकार किया गया कि पुराने सर्कुलर में दंडात्मक प्रावधान नहीं थे।

लेकिन कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। कारण–

  • सर्कुलर वापस लिया गया, पर विकल्प नीति नहीं लाई गई
  • बिना मान्यता की स्थिति में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षण गुणवत्ता कौन देखेगा?

नई नीति पर काम जारी – सात सदस्यीय समिति गठित

सरकार ने बताया कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत निजी प्ले स्कूलों के लिए नियम बनाने सात सदस्यीय समिति बनाई गई है। मसौदा तैयार है, लेकिन अभी विचाराधीन है।

कोर्ट ने निर्देश दिया:

  • जल्द से जल्द ठोस नियम बनाई जाए
  • हाईकोर्ट को प्रगति रिपोर्ट दी जाए
  • बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए

सबसे बड़ा सवाल – इन बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा?

330 से अधिक स्कूलों में पढ़ रहे हजारों मासूमों का क्या होगा?

  • क्या उन्हें क्लास-1 में प्रवेश मिलेगा?
  • क्या उनके प्रमाणपत्र मान्य होंगे?
  • क्या अभिभावकों को न्याय मिलेगा?

याचिकाकर्ता का तर्क:
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो ये बच्चे निजी स्कूलों में प्रवेश से भी वंचित रह सकते हैं।

अगली सुनवाई – 6 हफ्ते बाद

अब शिक्षा विभाग को नया शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट करना होगा–

  • 2013 का सर्कुलर क्यों वापस लिया गया?
  • नई मान्यता नीति कब लागू होगी?
  • बिना मान्यता चल रहे स्कूलों पर कार्रवाई कब होगी?

हाइलाइट बॉक्स

राज्य में हालात

  • 330+ नर्सरी और प्ले स्कूल बिना मान्यता
  • न तो पंजीकरण, न ही नियमन

कोर्ट का सख्त रुख

  • “बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई तो होगी सीधी कार्रवाई”
  • नई शिक्षा नीति जल्द लाने का निर्देश

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