रायपुर: 05 अगस्त 2025;
प्रदेश में बिना मान्यता के चल रहे 330 से अधिक नर्सरी स्कूलों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई है। मंगलवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि “आपके जवाब से तो ऐसा लग रहा है कि पानठेला वाले भी स्कूल खोल सकते हैं।” कोर्ट ने बच्चों और पालकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले स्कूलों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और प्रत्येक प्रभावित बच्चे को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए हैं।
नियमों की अनदेखी पर सख्त टिप्पणी
जनहित याचिका कांग्रेसी नेता विकास तिवारी ने दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि 2013 से मान्यता अनिवार्य होने के बावजूद कई नर्सरी स्कूल बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं। कोर्ट ने जब शिक्षा विभाग के शपथ पत्र में कहा पाया कि नर्सरी स्कूलों को मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है, तो अधिवक्ता संदीप दुबे ने 2013 के सर्कुलर का हवाला देते हुए इसे झूठा बताया। इस पर कोर्ट ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा, “जब बड़े स्कूल संचालकों पर कार्रवाई का समय आया तो आपने नियम ही बदल डाले। मर्सिडीज वालों को बचाने के लिए सरकार नियमों के साथ खिलवाड़ कर रही है।”
बच्चों का भविष्य दांव पर
कोर्ट ने कहा कि शिक्षा विभाग ने 25 जुलाई को कमेटी बनाकर मात्र दो दिनों में रिपोर्ट दे दी, जिससे साफ जाहिर होता है कि यह सब बड़े स्कूलों को बचाने के लिए किया गया है। “गली-मोहल्ले में स्कूल खोलकर लाखों कमाए और अब बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं,” चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की।
शिक्षा सचिव की गैरहाजिरी पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान जब बताया गया कि शिक्षा सचिव अवकाश पर हैं, तो कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की: “सचिव साहब तो हमारे डर से छुट्टी बढ़ा देंगे। इतने गंभीर मामले में उनकी अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” कोर्ट ने 13 अगस्त तक शिक्षा सचिव या संयुक्त सचिव से नया शपथ पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य निर्देश:
- बिना मान्यता 12 वर्षों तक चले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हो।
- हर प्रभावित बच्चे को ₹5 लाख मुआवजा दिया जाए।
- बच्चों को अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिफ्ट किया जाए।
- दोषी स्कूल संचालकों पर क्रिमिनल केस दर्ज हो।
अगली सुनवाई 13 अगस्त को निर्धारित है। कोर्ट की इस सख्ती से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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