सुकमा: 24 जुलाई 2025
सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। जिले के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के कुशल नेतृत्व में चल रही आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति, “नियद नेल्ला नार योजना” और “पुना मारगेम” अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इन्हीं पहलों से प्रेरित होकर 5 सक्रिय नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है।
इन नक्सलियों ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑप्स) रोहित शाह और सीआरपीएफ 131वीं वाहिनी के सहायक कमांडेंट अमित श्रीवास्तव के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पुलिस के अनुसार, सभी आत्मसमर्पित नक्सली लंबे समय से सुकमा जिले के जगरगुंडा और चिंतलनार थाना क्षेत्रों में सक्रिय थे।
इन नक्सलियों पर पुलिस गश्त पर निगरानी रखने, सड़कों में आईईडी और स्पाइक लगाने, मार्गों को बाधित करने और शासन विरोधी पर्चे-पाम्फलेट चिपकाने जैसे गंभीर आरोप हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में कई नक्सली रणनीतिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
छत्तीसगढ़ शासन की नवीन “नक्सलवादी आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति – 2025” के तहत सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा अन्य पुनर्वास सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
पुलिस ने इसे नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है और उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में और भी नक्सली मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
“पुना मारगेम” यानी “नई राह की ओर” — इस नारे को चरितार्थ करते हुए सुकमा पुलिस ने एक बार फिर आदिवासी युवाओं को हिंसा छोड़कर विकास की राह पर लाने में सफलता पाई है।
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