रायपुर: 16 जुलाई 20’25
एम्स (AIIMS) में जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों वाले बच्चों (clubfoot) पर रिसर्च चल रही है। इस रिसर्च में, जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों की समस्या, जिसे क्लबफुट भी कहा जाता है, के कारणों, निदान, और उपचार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। एम्स के डॉक्टर, जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों के कारणों को समझने और प्रभावी उपचार प्रदान करने के लिए, विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन कर रहे हैं।
रिसर्च के मुख्य बिंदु:
- कारणों की पहचान:रिसर्च में, गर्भावस्था के दौरान माँ के स्वास्थ्य, आनुवंशिक कारकों, और पर्यावरणीय कारकों जैसे विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है ताकि जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों के कारणों का पता लगाया जा सके।
- प्रारंभिक निदान:एम्स के डॉक्टर, जन्म के तुरंत बाद, या गर्भावस्था के दौरान ही, क्लबफुट का पता लगाने के लिए, विभिन्न नैदानिक तरीकों का उपयोग कर रहे हैं।
- उपचार विधियों का विकास:रिसर्च में, प्लास्टर, विशेष जूते, और सर्जरी जैसे विभिन्न उपचार विधियों का मूल्यांकन किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को सर्वोत्तम संभव उपचार मिले।
- समुदाय में जागरूकता:एम्स, क्लबफुट के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए, समुदाय में कार्यक्रम आयोजित कर रहा है ताकि माता-पिता को समय पर उपचार के महत्व के बारे में जानकारी मिल सके।
क्लबफुट (जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर):
जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़े हुए होते हैं।
यह स्थिति गर्भावस्था के दौरान या जन्म के समय हो सकती है।
सही समय पर इलाज न होने पर, यह स्थिति बच्चे के चलने और दौड़ने में कठिनाई पैदा कर सकती है।
एम्स में चल रहे इस रिसर्च का उद्देश्य, जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों से पीड़ित बच्चों के जीवन को बेहतर बनाना है।
इस रिसर्च के माध्यम से, डॉक्टरों को इस स्थिति के कारणों और प्रभावी उपचारों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त होगी, जिससे बच्चों को बेहतर भविष्य मिल सकेगा।
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